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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन

DevanagariHindipublished213 pages

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महाबोधि-सभा (संस्थापक—भिक्षु श्री देवमित्र धर्मपाल) चालीस वर्षसे यह सभा भारतियोंको आत्मविस्मृतिसे उठाने, एवं भगवान् बुद्धके दिव्य सन्देशको पहुँचानेका प्रयत्न कर रही है। निम्न संस्थाओंका यह संचालन कर रही है— १. मूलगन्धकुटी विहार, ऋषिपत्तन, सारनाथ (बनारस)। एक लाखसे ऊपर रुपये खर्च कर ७०० वर्ष बाद सभाने (१) इस मन्दिरको उस पवित्र स्थान पर बनवाया है, जहाँ पर भगवान् बुद्धने संसारको सब प्रथम अपना धर्म-सन्देश दिया। (२) इसके साथ ही ८०००) के व्ययसे पुस्तकालय-भवन बनाया गया है। इसके साथ पुस्तकालय, अन्तर्राष्ट्रीय-विद्यालय, भिक्षु-आश्रम, निःशुल्क हिन्दी स्कूल हैं। शीघ्र ही एक धर्मार्थ चिकित्सालय भी खुलने जा रहा है। २. श्रीधर्मराजिका-चैत्य-विहार, ४ए, कालेज स्कायर, कलकत्ता। मंदिर, विश्रामगृह, पुस्तकालय, वाचनालयके साथ। ३. झाडिवत्था-स्मारक धर्मशाला, मेकवर्गोपगंज, गया। संसार भरके बौद्ध यात्रियोंकेलिये धर्मशाला, साथ ही एक निःशुल्क पाठशाला भी है। ४. महाबोधि-विश्रामगृह, बोधगया। ५. फोस्टर-स्मारक-शाला, पेराम्बुर, मद्रास। विश्राम-गृह, प्रचार- केन्द्र और प्राथमिक स्कूल। ६. Mahabodhi Journal (Calcutta), यह मासिकपत्र ४० वर्ष से निकल रहा है। वार्षिक मूल्य ५) है। ७५) भेजकर आजही सब ग्राहक बन सकते हैं। इनके अतिरिक्त इङ्गलैण्ड और युरोपमें बौद्धधर्म-प्रचारकेलिये लन्दनमें प्रचारक-मंडल (Buddhist Mission, 41, Gloucester Road, London, N. W. 1.) है। कोलम्बो में भी चिकित्सालय, विद्यालय आदि कितनी ही संस्थायें हैं। ऐसी संस्था आपकी सहायताका पात्र है। —ब्रह्मचारी देवप्रिय, प्रधान मंत्री, महाबोधिसभा, ऋषिपत्तन, सारनाथ (बनारस)।