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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन

DevanagariHindipublished213 pages

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४६ ] धम्मपदं [ ७।१० ( विषय-) भोगको वमनकर दिया जो नर है, वही उत्तम पुरुष है । जेतवन ( खदिरवनी ) रेवत ( थेर ) ९८–गामे वा यदि वाऽरञ्ञे निम्ने वा यदि वा थले । यत्थारहन्तो विहरन्ति तं भूमिं रामणेय्यकं ॥९॥ ( ग्रामे वा यदि वाऽऽरण्ये निम्ने वा यदि वा स्थले । यत्रार्हन्तो विहरन्ति सा भूमी रमणीया ॥ ९ ॥ ) अनुवाद—गाँवमें या जंगलमें, निम्न या ( ऊँचे ) स्थलमें जहाँ ( कहीं ) अर्हत् ( लोग ) विहार करते हैं, वही रमणीय भूमि है । जेतवन आरण्यक भिक्षु ९९–रमणीयानि अरञ्ञानि यत्थ न रमते जनो । वीतरागा रमिस्सन्ति न ते कामगवेसिनो ॥१०॥ ( रमणीयान्यरण्यानि यत्र न रमते जनः । वीतरागा रंस्यन्ते न ते कामगवेषिणः ॥ १० ॥ ) अनुवाद—( वह ) रमणीय वन, जहाँ ( साधारण ) जन रमण नहीं करते, काम(भोगों)के पीछे न भटकनेवाले वीतराग (वहाँ) रमण करेंगे । ७–अर्हद्वर्ग समाप्त