धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन
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Read in context( १० ) व्यवस्थापकीय वक्तव्य रक्त-मांस भाषा-विचार सभी दृष्टियोंसे हिन्दीभाषाभाषी भग- वान् बुद्धके उत्तराधिकारी हैं। इन्हीं के पूर्वजोंने उनके अमृतमय उपदेशोंको सर्व प्रथम अपनाया । इन्होंने ही दुनियामें भारतकी धार्मिक और सांस्कृतिक विजयदुन्दुभी बजाई । पूर्वजोंकी इस अद्भुत और अमर कीर्त्तिका स्मरण करते, किसका शिर ऊँचा न होगा । लेकिन, यह कितने शोककी बात है, कि मातृ-भाषा हिन्दीमें भगवान् के दिव्य संदेश नहींके बराबर हैं । इसी कमी को दूर करनेके लिये हिन्दीमें महाबोधि-ग्रंथ-माला निकालनेका उप- क्रम हुआ है । धम्मपद मालाका प्रथम पुष्प है । आगे निकलनेवाली पुस्तकोंके सस्तेपन और सुंदर छपाईका अनुमान इसी पुस्तकसे आप कर सकते हैं । मालाकी दूसरी पुस्तक होगी—मज्झिमनिकाय । हम आशा करते हैं, कि हिन्दीप्रेमी सज्जन इस काममें हमारा हाथ बँटायेंगे और आठ आना भेज कर मालाके स्थायी ग्राहक बन जायेंगे । ( ब्रह्मचारी ) देवप्रिय प्रधानमंत्री, महाबोधि सभा, ऋषिपत्तन, सारनाथ ( बनारस )