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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन

DevanagariHindipublished213 pages

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५८ ] धम्मपदं [ ९।११ जेतवन कोक (कुत्तेका शिकारी) १२५-यो अप्पदुट्ठस्स नरस्स दुस्सति सुद्धस्स पोसस्स अनङ्गणस्स। तमेव बालं पच्चेति पापं, सुखु मो रजो पटिवातं 'व खित्तो ॥१०॥ (योऽल्पदुष्टाय नराय दुष्यति शुद्धाय पुरुषायऽनङ्गणाय । तमेव बालं प्रत्येति पापं, सूक्ष्मो रजः प्रतिवातमिव क्षिप्तम् ॥१०॥) अनुवाद—जो दोपरहित शुद्ध निसंल पुरुषको दोप लगाता है, उसी अज्ञको (उसका) पाप लौटकर लगता है, (जैसे कि) सूक्ष्म धूलिको हवाके आनेके रुख फेंकनेसे (वह फेंकनेवाले पर पडती है)। जेतवन (माणिकारकुलूपग) तिस्स (थेर) १२६-गब्भमेके उप्पज्जन्ति निरयं पापकम्मिनो । सग्गं सुगतिनो यन्ति, परिनिब्बन्ति अनासवा ॥११॥ (गर्भमेक उत्पद्यन्ते, निरयं पापकर्म्मिणः । स्वर्गं सुगतयो यान्ति, परिनिर्वान्त्यनास्रवाः ॥११॥) अनुवाद—कोई (पुरुष) गर्भमें उत्पन्न होते हैं, (कोई) पाप- कर्मा नरकमें (जाते हैं), (कोई) सुगतिवाले (पुरुष) स्वर्गको जाते हैं; (और चित्तके) मलोमे रहित (पुरुष) निर्वाणको प्राप्त होते हैं।

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