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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन

DevanagariHindipublished213 pages

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( १६ ) ( ७ ) पेत-वत्थु ( १५ ) चरियापिटक ( ८ ) थेर-गाथा २. विनयपिटक निम्न भागोंमें विभक्त है— १—सुत्तविभंग— ( १ ) भिक्खु-विभंग (\Big}) या (\Big{) ( १ ) पाराजिक ( २ ) भिक्खुनी-विभंग (\quad) ( २ ) पाचित्तिय २—खन्धक— ( १ ) महावग्ग ( २ ) चुल्लवग्ग ३—परिवार ३. अभिधम्मपिटकमें निम्नलिखित सात ग्रंथ हैं— १. धम्मसंगणी ५. कथावत्थु २. विभंग ६. यमक ३. धातुकथा ७. पट्ठान ४. पुग्गलपञ्ञत्ति धम्मपद (=धर्मपद) त्रिपिटकके खुद्दकनिकाय विभागके पंद्रह ग्रंथों- मेंसे एक है। इसमें भगवान् गौतम बुद्धके मुखसे समय समयपर निकली ४२३ उपदेशगाथाओंका संग्रह है। चीनी तिब्बती आदि भाषाओंके पुराने अनुवादोंके अतिरिक्त, वर्तमान कालकी दुनियाकी सभी सभ्य भाषाओंमें इसके अनुवाद मिलते हैं, अंग्रेजीमें तो प्रायः एक दर्जन हैं। भारतकी अन्य भाषाओंकी तरह हमारी हिन्दी भी इसमें किसीसे पीछे नहीं है। जहाँ तक मुझे मालूम है, हिन्दीमें धम्मपदके अभीतक पाँच अनु- वाद हो चुके हैं, जिनके लेखक हैं— १. श्री सूर्यकुमारवर्मा हिन्दी ( १९०४ ई० ) २. भदन्त चन्द्रमणि महास्थविर हिन्दी और पालीदोनों (१९०९ ई०)