धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन
DevanagariHindipublished213 pages
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१३—लोकवग्गो जेतवन कोई अल्पवयस्क भिक्षु १६७-हीनं धम्मं न सेवेय्य, पमादेन न संवसे । मिच्छादिट्ठिं न सेवेय्य न सिया लोक-वड्ढनो ॥ १॥ (हीनं धर्मं न सेवेत, प्रमादेन न संवसेत् । मिथ्यादृष्टिं न सेवेत, न स्यात् लोकवर्द्धनः ॥१॥) अनुवाद—पाप(=नीच धर्म)को न सेवन करे, न प्रमादसे लिस होवे, झूठी धारणाको न सेवन करे, (आदमीको) लोक- (=जन्म मरण)-वर्द्धक नहीं बनना चाहिये । कपिलवस्तु (न्यग्रोधाराम) शुद्धोदन १६८-उत्तिट्ठे नप्पमज्जेय्य धम्मं सुचरितं चरे । धम्मचारी सुखं सेति अस्मिं लोके परम्हि च ॥२॥ (उत्तिष्ठेत् न प्रमाद्येद् धर्मं सुचरितं चरेत् । धर्मचारी सुखं शेतेऽस्मिं लोके परत्र च ॥२॥) [ ७७