इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextहोना सम्भव है। रजः से अधिक मात्रा वीर्य की होने पर ही पुत्र उत्पन्न होता है। इसलिए उचित है कि पुत्र की इच्छा के लिए गर्भाधान क्रिया से २ या ३ मास पूर्व वीर्य को अधिक उत्पन्न करने वाले पदार्थों एवं औषधि का सेवन करना अत्यन्त आवश्यक है। ध्यान रहे पुरुष का वीर्य अधिक होने पर भी अयुग्म रात्रि में गर्भाधान करने से कन्या ही जन्म लेगी। क्योंकि उस तिथि में स्त्री का रजः इतना अधिक मात्रा में होता है कि उससे किसी भी प्रकार पुरुष का वीर्य अधिक नहीं हो सकता।
यदि किसी भी प्रकार से पुरुष का वीर्य स्त्री के रजः से अधिक होना सम्भव न हो सके तो ऐसी अवस्था में हम उन्हें एक विशेष साधन से अवगमन कराते हैं।
जिस प्रकार स्त्री को मासिक धर्म के दिन से युग्मायुग्म रात्रि के हिसाब से स्त्री का रजः न्युनाधिक होता है उसी प्रकार एक मास में स्त्री का रजः न्यून और अगले मास में अधिक होता है। प्रत्येक व्यक्ति के लिये यह सम्बन्ध नहीं कि वह किसी भी मास में यह जान सके कि इस मास में स्त्री का रजः न्यून मात्रा में है या अधिक मात्रा में। इसका सरल उपाय निम्न प्रकार है—
उदाहरण— यदि स्त्री ने कन्या को जन्म दिया तो कन्या का जन्म होने के पश्चात् जो प्रथम मासिक धर्म होगा वह मास रजः न्यून का मास होगा। इसके पश्चात् जब अगला मासिक धर्म होगा तो वह रजः प्रधान मास होगा। इसी प्रकार क्रम से एक मास रजः न्यून का और अगला मास रजः प्रधान का होता है।
कन्या का जन्म होने के पश्चात्—
| रजः न्यून मास | रजः प्रधान मास ---|---|--- प्रथम मासिक धर्म | (१) दिनांक..... | (२) दिनांक..... (३) दिनांक..... | (४) दिनांक..... (५) दिनांक..... | (६) दिनांक..... |
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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