इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextसोलह कला
रात्री चतुर्थ्यां पुत्रभ्यात् अल्पायुर्धन वंजिताः। पंचम्यां पुत्रिणी नारी बाढ्यां पुत्रस्तु मध्यमः॥ सप्तम्याम् प्रजायोषिदष्टम्यां मीश्वरः सुतः। नवम्यां शुभगानारी दशम्यां चतुरः पुमान्॥ एकादश्यामधर्मास्त्री द्वादश्यां पुरुषोत्तमः। त्रयोदश्यां सुतातस्यवर्ण संकर करिणी॥ धर्माश्वचकृतशश्च आत्मवेदीदृढाव्रतः। प्रजापतये चतुर्दश्यां गुणी वैजंगतीपतिः॥ रजपत्नीमहाभागराजवंशगता तथा। जायते पंचदश्यात् बहुपुत्रापतिव्रता॥ विद्यालक्षण सम्पूर्ण सत्यवादी जितेन्द्रियः। आश्रायः सर्वभूतानां षोडश्यां जायते पुमान्॥
व्यासः
अर्थ- चौथी रात्रि का गर्भ अल्पायु और दरिद्री पुत्र का देने वाला है।
पौर्चर्यां रात्रि में कन्या पुत्र वाली।
छठी रात्रि में पुत्र मध्यमायु वाला।
सातवीं रात्रि में कन्या बन्ध्या।
आठवीं रात्रि में पुत्र ऐश्वर्यशाली।
नवमीं रात्रि में कन्या ऐश्वर्यशालिनी।
दसवीं रात्रि में चतुर बालक।
ग्यारहवीं रात्रि में दुश्चरित्र कन्या।
बारहवीं रात्रि में पुरुषोत्तम पुत्र।
तेरहवीं रात्रि में वर्णसंकर सन्तान उत्पन्न करने वाली कन्या।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri