इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextदिन १५ बीज, दसवें दिन १६ बीज, ग्यारहवें दिन १७ बीज सेवन करायें और रात्रि को इन्हीं ८ दिन नित्य स्वर्ण भस्म नागकेशर के योग का प्रयोग गाय के दूध से करायें तथा ८, १०, १२ रात्रि में गर्भाधान करे निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। ध्यान रहे अब अशोक की छाल के दूध का प्रयोग नहीं कराना है। यदि गर्भ धारण न हुआ हो तो शिलिंगी और स्वर्ण भस्म नागकेशर के योग का फिर सेवन करायें। इसी प्रकार २ या ३ मास के प्रयत्न से निश्चित सफलता मिलेगी।
गर्भ धारण के तात्कालिक
लक्षण
योनि में वीर्य का सम्यक रीति से ग्रहण, तृप्ति, कोख में भारीपन, फड़कन, समागम के पश्चात् योनि से वीर्य का बाहर न निकलना, हृदय में प्रसन्नता, नेत्रों में आलस्य, तृष्ण, ग्लानि और रोमांच होना। ये लक्षण गर्भ धारण होने के साथ स्पष्ट अनुभव होते हैं।
गर्भ रक्षा
किसी भी सभ्य देश के स्वास्थ्य स्तर का सर्वोत्तम अनुमान उस देश के निवासियों के जन्म-आयु और मृत्यु सम्बन्धी आँकड़ों से जाना जा सकता है। शिशु-मृत्यु संख्या और मातृ मृत्यु संख्या देश के सामाजिक जीवन के सच्चे दर्पण हैं।
हमारे देश में शिशुओं की मृत्यु संख्या और देशों की अपेक्षा अत्याधिक है। देश का भविष्य इन शिशुओं पर ही अवलम्बित है।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri