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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

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विश्राम- गर्भावस्था में उचित विश्राम की उतनी हो आवश्यकता है जितनी नियमित भोजन की। प्रतिदिन तीसरे पहर कम से कम १ घण्टा पूर्ण विश्राम करना चाहिए। लेटते समय पैर नीचे न हों। पैरों के नीचे तकिया लगा लेना उचित है। इसके अतिरिक्त यदि किसी समय थकान अनुभव हो और विश्राम की इच्छा हो तो उस समय विश्राम अवश्य करना चाहिए।

रात्रि होने पर अधिक समय तक नहीं जागना चाहिए। और ८ घण्टे का पूर्ण निद्रा लेनी उचित है। मासिक धर्म को तिथियों में तो पूर्ण विश्राम करना चाहिए।

जो स्त्रियाँ गर्भधारण के पश्चात् आराम ही करती हैं उनके बच्चे निर्बल होते हैं और जो बराबर परिश्रम करती रहती हैं उनके भी बच्चे निर्बल होते हैं। इसलिए आरम्भ में हल्का परिश्रम अर्थात् घर का काम-काज करना परन्तु भारी वजनदार वस्तु को उठाना ऊँचे पर रखी हुई वस्तु को उचक कर उतारना, लम्बी यात्रा करना, जीने पर अधिक चढ़ना-उतरना उखरू बैठना आदि कार्य नहीं करना चाहिए और अन्त के तीन महीनों में जितना अधिक से अधिक हो सके उतना विश्राम करना चाहिए। इस प्रकार से सन्तान पुष्ट होगी। सायं समय वायु सेवन के लिए जाना चाहिए।

स्नान- नित्य ताजे जल से स्नान करना चाहिए तथा रुचि न होने पर स्नान नहीं करना चाहिए। यह आवश्यक नहीं कि ठण्डे ही जल से स्नान किया जाय यदि रुचि हो तो किंचित गर्म जल से भी स्नान किया जा सकता है। ध्यान रहे गर्म जल में ठण्डा जल मिलाकर स्नान नहीं करना चाहिए।

स्तन- गर्भ स्थित होने के पश्चात् स्तनों में वृद्धि होने लगती है इस कारण चोली ढीली रखनी चाहिए और स्नान समय स्तनों को भी भली प्रकार जल से स्वच्छ करके अच्छी प्रकार पोछ लेना आवश्यक है।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri