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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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उपरान्त पीछे की ओर तीन मास गिनने से प्रसव का सम्भावित समय ज्ञात हो जाता है।

प्रसव स्थान- प्रसव काल से पूर्व ही यह निश्चय कर लेना चाहिए कि प्रसव कहाँ हो। चिकित्सालय अथवा प्रसूतिका गृह में प्रसव होना माँ और बच्चे दोनों के लिए ही हितकर है।

१- यह नहीं कहा जा सकता कि प्रसव काल में कब और कौसी आकस्मिक अवस्थायें उत्पन्न हो जायें। चिकित्सालय में ऐसी आकस्मिक अवस्थाओं की तत्काल उचित चिकित्सा हो सकती है।

२- कोई भी घर अथवा अन्य स्थान इतना स्वच्छ नहीं रहता जितना चिकित्सालय या प्रसूति का गृह आदि विशेष रूप से बनाये जाते हैं।

३- चिकित्सालय में माँ और बच्चे को हर प्रकार का आवश्यक परामर्श हर समय मिल सकता है।

४- चिकित्सालय में माँ को लगभग २ सप्ताह का पूर्ण विश्राम मिल जाता है। जो इस अवस्था में अधिक आवश्यक है।

प्रसव आरम्भ होने के लक्षण- प्रारम्भ में योनि से रक्त मिश्रित स्त्राव होता है इसके साथ साथ गर्भाशय का आर्कूचन प्रारम्भ होता है। जिसके कारण पेट में एक विशेष प्रकार की एंठन और दबाव का अनुभव होता है। जो कि पेट से चलकर रानों तक अनुभव होता है। यह एंठन पीठ से भी प्रारम्भ हो सकती है और जब पीठ से पेट की ओर, और पेट से नीचे रानों की ओर आती है। प्रारम्भ में यह एंठन बहुत अधिक नहीं होती और अधिक समय पूर्व होती है। धीरे-धीरे इसकी गति बढ़ती जाती है और यह तीव्र दर्द में परिणित होने लगती है, साथ ही बीच के अन्तर का समय भी कम होता जाता है। बस यही प्रसव का निकटतम समय है। ऐसे समय में बिलम्ब नहीं करना चाहिए, अपने जहाँ का निश्चय कर रखा हो प्रसव के लिए तत्काल ले जाना चाहिए। ***

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri