इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextदूध निकाल कर भूमि पर गिरा देने के पश्चात् बालक को स्तन पान करायाँ।
देखा गया है जब कोई स्त्री अपने बालक को स्तन पान कराने को होती है और उस समय यदि उसके पास कोई बूढ़ा स्त्री हो तो वह कहती पहले एक थार भूमि माता को चढ़ा दे। वह बूढ़ी माता इसके रहस्य को नहीं जानती। जब बालक ने स्तन पान करते- करते स्तन को छोड़ दिया तो उस समय थोड़ा-सा दूध स्तन वृत्त में रह जाता है। जो बाहर की चाय लगने से जम जाता है। जब वह जमा हुआ दूध बालक के पेट में पहुँचने तो बालक को अनेक रोग हो जायेंगे। जैसे दूध का डालना, दस्तों का हो जाना, अपच आदि व्याधियाँ हो जाती हैं। इसीलिए स्तन पान कराने से पहले स्तन के अग्रभाग का जमा हुआ दूध निकालने के कारण ही भूमि पर पहले दूध की थार गिरा देने की प्रथा थी।
भोजन बनाने के पश्चात् तत्काल बालक को स्तन पान नहीं कराना चाहिए। इससे बच्चे में पित्त दोष उत्पन्न हो जाता है और स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है। इस कारण जब शरीर ठण्डक पाले तब ही बालक को स्तन पान करायाँ।
क्रोध के समय भी बालक को स्तन पान नहीं कराना चाहिए। क्रोधी व्यक्ति के रक्त को यदि खरगोश के शरीर में प्रवेश करा दिया जाय तो वह खरगोश मर जायगा। इसीलिये क्रुद्ध अवस्था में यदि बालक को स्तन पान करा दिया गया तो वह तत्काल मूर्छित हो जायगा। यदि बालक पहले से ही निर्बल है तो वह मृत्यु को भी प्राप्त हो सकता है।
स्तन के पश्चात् स्तन पान कराने से ठण्ड का विकार बालक को हो जाता है।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri