इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextपश्चात् बालक को स्तन पान कराना उचित है।
इस प्रकार स्तन पान से बालक सभी रोगों से बचकर हृष्ट-पुष्ट रहेंगे।
साधारणतया स्तन पान दिन में ४ या ५ बार और रात्रि में १ बार कराना उचित है। यदि किसी कारण माता का दूध कम हो, अथवा बिल्कुल न हो तो गाय का दूध सर्वोत्तम है। गाय का दूध ३ भाग और जल ६ भाग एक उबाल का। बालक जैसे-जैसे बड़ा होता जाय वैसे-वैसे दूध की मात्रा अधिक और जल की कम करते जाना चाहिए। यह भी बच्चे को ३-३ घन्टे बाद देना चाहिए। शरद् ऋतु में बालक के दूध में औटते समय एक-दो पीपल छोटी तोड़कर डाल दें या सौंठ का छोटा-सा टुकड़ा। इससे बच्चे को ठण्ड का विकार नहीं होता और पाचन क्रिया भी ठीक रहती है।
माता का दूध कम होने पर
शतावर्ष का चूर्ण समान भाग मिश्री मिलाकर ६ माशा प्रातः, सायं को दूध के साथ देने से स्त्रियों के दूध अधिक उतरने लगता है।
अथवा
तोदरी सफेद बड़ी वाली का चूर्ण ६ माशा को १ पाव दूध १ पाव जल में मिलाकर मन्द मन्द अग्नि पर पकायें जब दूध मात्र रह जाने पर मीठा डालकर सेवन कराने से स्त्रियों को दूध अधिक उतरने लगता है।
इनका सेवन कम से कम दो सप्ताह तक अवश्य करें।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri