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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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साम्यता का देने वाला कहा जाता था। वह भारतवर्ष ब्रह्मचर्य से हीन होकर कैसी निकुष्ट दशा को प्राप्त हुआ है। जहाँ हमारा नेतृत्व करने वालों की कमी नहीं थी, उस देश में अब नेतृत्व करने वालों की कमी ही नहीं वरन् अभाव है क्या आप बता सकते हैं कि हमारे बीच से जो नेता, सुधारक पथप्रदर्शक चला गया उसके स्थान पर दूसरा आया? नहीं। जैसे ऋषि दयानन्द सरस्वती का स्थान रिक्त हुआ उसकी पूर्ति नहीं हुई। इसी प्रकार स्वामी श्रद्धानन्द जी, पं.लेखराम, पंजाब केसरी लाला लाजपतराय महात्मा गांधी, सरदार पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं. जवाहर लाल नेहरू, इन सब के जाने के पश्चात् इनके स्थानों की पूर्ति नहीं हुई नाही भविष्य में दीखता है कि पूर्ति हो।

ब्रह्मचर्य के नियमोल्लंघन ने आज भारतवर्ष का नाश कर डाला है आज भी यह समझा जाय कि जिस वीर्य के पतन से हमारे क्षति हुई। इसके रक्षण से जो लाभ होगा उससे हमारी सन्तान भयानक दुःखों और क्लेशों से मुक्त होगी और उनका पुरुषत्व पुनः संसार के इतिहास में आकाश के दिवाकर सद्गुण दैदीप्यमान होने लगेगा।

अतएव आपको चाहिए कि अपनी सन्तानों को और स्वयं भी ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करते कराते हुए विद्या पढ़ें पढ़ाएँ और बच्चों को वीर पुरुषों के चित्र तथा कहानियाँ सुनाकर उनके हृदय-पट पर सच्चरित्रता चित्र को अंकित कर दें ताकि उन बच्चों को यश, कीर्ति, बुद्धि और तेज से यथा समय लाभ पहुंच सके।

तरुणावस्था भी कैसी मनमोहक अवस्था है। शैशवावस्था को पार कर तरुणावस्था में पदार्पण करते ही यौवन कुसुम खिलने लगता है, मुखमण्डल पर गुलाबी रंगत लहराने लगती है। इसी अवस्था में शरीर के गठन का सौन्दर्य प्रत्येक दृष्टिगोची को अपनी ओर आकर्षित करता है। यही काल मदन की तरंगों में लहराया करता है। द्वादश वर्षारम्भ में ही तरुणावस्था के चिन्ह प्रदर्शित होने

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri