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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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शास्त्रस्य पारङ्गत्वा तु भूयोभूयस्तदभ्यसेत्। तच्छास्त्रं सबलं कुर्यान् चाधीत्य त्यजत्युनः॥

अर्थात् शास्त्र में पारंगत होकर भी बार-बार अभ्यास करता रहे। उस शास्त्र को समुन्नत करे न कि पढ़ कर फिर छोड़ दे।

एकोऽपि गुणवान् पुत्रो निर्गुणैश्च शतर्वरः। एकश्चन्द्रस्तमो हन्ति न च ताराः सहस्रशः॥

अर्थात् सैकड़ो गुण रहित पुत्रों की अपेक्षा एक ही गुणी पुत्र श्रेष्ठ है। एक ही चन्द्रमा अन्धकार को नष्ट कर देता है, सहस्रों तारे नहीं।

प्रयत्न करना प्रत्येक मानव का कर्तव्य है, परन्तु फल देना परमेश्वर का। तभी तो यदा कदा प्रयत्न करने के पश्चात्, फल के स्थान पर अपवाद ही सामने आता है।

‘चेतावनी’ प्रकरण को सर्वप्रथम पढ़िये...

पृष्ठ १२१ पर

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

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