BharatKosha
जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक

Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)

DevanagariHindipublished479 pages

Page 211 of 479

Read in context
Page 211

१६६ [ २२।६४

१६४. गिज्झ जातक "यं ननु गिज्झो योजनसतं···" यह शास्ता ने जेतवन में विहार करते समय माता पिता का पोषण करने वाले एक भिक्षु के बारे में कही। क. वर्तमान कथा इसकी कथा साम जातक¹ मे आएगी। शास्ता ने उस भिक्षु से पूछा— 'भिक्षु ! क्या तू सचमुच गृहस्थो का पोषण करता है ?' 'हाँ ! सचमुच' कहने पर पूछा—'वह तेरे क्या लगते हैं ? "भन्ते ! वे मेरे माता पिता हैं।" "बहुत अच्छा ! बहुत अच्छा !" कह अन्य भिक्षुओं को शास्ता ने मना किया—"भिक्षुओ ! इस भिक्षु पर क्रोध न करें। पुराने समय में पण्डित- जन गुणों का ख्याल करके भी रिश्तेदारो का उपकार करते रहे हैं। इसका तो कर्तव्य है कि यह माता पिता की सेवा करे" कह पूर्व-जन्म की कथा कही। ख. अतीत कथा पुराने समय मे वाराणसी में ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय बोधिसत्व गृद्ध-पर्वत पर गृध्र होकर पैदा हो माता पिता का पोषण करते थे। एक बार बडा आंधी-पानी आया। गृध्र आंधी-पानी न सह सकने के कारण शीत से डर कर वाराणसी जा वहाँ चारदीवारी के पास, खाई के निकट सर्दी से कांपते हुए बैठे। वाराणसी-सेठ नगर से निकल कर नहाने जा रहा


¹ साम जातक (५४०)