जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक
Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)
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Read in contextदूसरा परिच्छेद ४. असदिस वर्ग १८१. असदिस जातक “धनुग्गहो असदिसो...” यह शास्ता ने जेतवन में विहार करते समय महाभिनिष्क्रमण के बारे में कही। क. वर्तमान कथा एक दिन धर्मसभा में बैठे हुए भिक्षु भगवान् की नैष्क्रम्यपारमी की प्रशंसा कर रहे थे। शास्ता ने आकर पूछा—"भिक्षुओ, यहाँ बैठे क्या बात चीत कर रहे हो ?” 'अमुक बात चीत ।' "भिक्षुओ ! तथागत ने केवल अभी अभि- निष्क्रमण नहीं किया, पहले भी श्वेत-छत्र छोडकर अभिनिष्क्रमण किया है।" इतना कह शास्ता ने पूर्व-जन्म की कथा कही। ख. अतीत कथा पुराने समय में वाराणसी में ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय बोधिसत्त्व ने उसकी रानी की कोख में जन्म ग्रहण किया। सकुशल पैदा हुए उस राजकुमार का, नामग्रहण के दिन नाम रक्खा गया असदिसकुमार। जिस समय वह दौड भाग कर चलन फिरने लगा, एक दूसरे पुण्यवान् प्राणी ने देवी की कोख में जन्म ग्रहण किया। सकुशल पैदा हुए उस कुमार का नाम रक्खा गया ब्रह्मदत्त कुमार।