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जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक

Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)

DevanagariHindipublished479 pages

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२४८ [ २४.१८१ जहाँ सातो राजा भोजन कर रहे थे वहाँ सोने की थाली के ठीक बीच में जाकर गिरा। उन अक्षरों को देख मरने के भय से वह सभी भाग गए। इस प्रकार बोधिसत्त्व ने, छोटी मक्खी जितना खून पीती है उतना खून भी बिना बहाए सातो राजाओ को भगा दिया। फिर छोटे भाई से भेट कर, काम-भोग के जीवन को त्याग ऋषियो के प्रव्रज्या-क्रम से प्रव्रज्या ग्रहण की। अभिज्ञा तथा समापत्तियां प्राप्त कर जीवन समाप्त होने पर ब्रह्मलोकगामी हुए। शास्ता ने बुद्ध हुए रहने पर "भिक्षुओ ! असदिसकुमार ने सात राजाओ को भगा, संग्राम विजयी हो ऋषियों के क्रम से प्रव्रज्या ग्रहण की" कह, यह गाथाएँ कही— ६ धनुग्गहो असदिसो राजपुत्तो महब्बलो दूरेपाती अक्खणवेधी महाकायप्पदालनो ॥ सब्बामित्ते रणं कत्वान च किञ्चि विहेठयि भातरं सोत्थि कत्वान सञ्जमं अज्झुपागमि ॥ [ महाबलशाली, बडी बडी चीजो को बींधने वाले, अचूक निशाना लगाने वाले, धनुर्धारी असदिस राजपुत्र ने जो तीर को दूर गिराता था, बिना किसी को कष्ट दिए सभी शत्रुओं से युद्ध कर भाई का उपकार किया। वह स्वयं सन्यासी हो गया । ] असदिसो केवल नाम से ही नही, बल, वीर्य तथा प्रज्ञा में भी असदृश । महब्बलो शरीर-बल तथा ज्ञान-बल, दोनो बलो से बलशाली। दूरेपाती चातुर्महाराजिक भवन तथा तावतिंस भवन तक तीर पहुँचाने की सामर्थ्य रखने से, दूर गिराने वाला। अक्खणवेधि अचूक निशाने वाला, अथवा अक्खणा कहते है बिजली को, जितनी देर एक बार बिजली चमकती है, एक बार बिजली चमकने के, उतनी ही देर के प्रकाश में सात आठ बार तीर खेंकर बींधने वाला। महाकायप्पदालनो बडी चीजो को बींधने वाला। चर्म-काय, लकडी-काय, लोह-काय,¹ अयस्-काय, बालू-काय, उदक-काय तथा स्फटिक-काय, यह सात ¹ लोह = तांबा ।