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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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मंत्र जप करनेकी विशेष रीतिको मुद्रा कहते हैं। मीन मछली खाना, मांस, सबप्रकारका मांस खाना, सबप्रकारकी सराबपीकर मस्त होना, विवाहिता अविवाहिता सब प्रकारकी स्त्रियोंके साथ भोग करना। यदि सहृदय भग एक समय पूजन करनेको मिल जावे तो ये लोग साक्षात् मोक्ष मानते हैं। इस धर्मके बारह भेद हैं। सब एकसे एक बड़े चढ़े हैं। इसके लोग बड़े आनन्द और उत्साह पूर्वक अपने घृणित और नीच कर्मोंको करते हुये मोक्ष मानते हैं। इस धर्ममें जाति पौत्रिका बिलकुल विचार नहीं है। ब्राह्मण, क्षत्री, भंगी, चमार, मोची आदि नीच ऊँच जाति सब एक साथही खाते हैं। अनन्त जीवधारियोंकी हत्या करते हैं।

दैवी और आसुरी सम्प्रदाय।

इस संसारमें दो देवताओंके धर्म प्रचलित हैं। संसारके सब धर्म इन्हींके अन्तर्गत हैं। एकका नाम दैवी धर्म है। इसके अधिष्ठाता विष्णु देव हैं। दूसरी सम्प्रदाय है जिसके प्रवर्तक शिव हैं। दैवी सम्प्रदायकोही श्रीसम्प्रदाय अथवा विष्णु सम्प्रदाय कहते हैं। आसुरी सम्प्रदायको शैवी वा शांकरी सम्प्रदाय बोलते हैं।

विष्णु सम्प्रदाय सत्गुणी धर्म और मुक्तिका मार्ग है। शिव सम्प्रदाय तमोगुणी धर्म और नरकका कारण है। येही दो देवते और इनके दोनों मार्ग, जीवोंके मुक्ति और बन्धनके कारण और द्वार हैं। विष्णुभक्त मुक्ति और स्वर्गके अधिकारी होते हैं; जैसे कि, ढरुव और प्रह्लाद अपने परिवार सहित स्वर्गको गये। विष्णु सम्प्रदायमें एकसे कितनोंका भला होता है, पर शिव सम्प्रदायसे सिवाय अशुभ और दुःखके दूसरा कुछ नहीं।

मुहम्मदी कहते हैं कि, मुहम्मद साबहके कलमा पढ़नेसे मुक्ति मिलती है, जो मुहम्मदी कलमा नहीं पढ़ता उसकी मुक्ति नहीं होती। जैसा कि, मुहम्मद साहबके माता पिता नरकको गये। क्योंकि, कलमा नहीं पढ़ते थे। जो कोई कलमा पढ़े तो उसपर किसीका अहसान ही क्या हो सकता है? क्योंकि, जब कलमा स्वयम् मुक्तिदायक है, जिससे कि, कलमा उत्पन्न हुआ स्वयम् उसके माता पिताको कलमाकी क्या आवश्यकता है? इससे प्रमाणित है कि, जब मुम्मद साहब अपने माता पिताको मुक्ति नहीं दे सके, तो दूसरोंको किस तरह दे सकेंगे।

कलियुगमें शंकर और मुहम्मद दोनों शिवके औतार हैं। एकने भारत-वर्षमें संन्यास धर्म चलाया, दूसरेने पश्चिमी देशोंमें इस्लाम धर्म प्रकट किया।