कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextगृहमें ले गई उस समय मरियम उसके पास दौड़ी गई और कहा कि, यदि आज्ञा दो तो मैं इस बच्चेके निमित्त एक दूध पिलानेवाली दाई ले आऊँ। तब राजकुमारीने आज्ञा दी कि, ले आओ। तब मरियम उसी समय गई और अपनी माताको बुललाई। राजकुमारीने उसे सेवा तथा दूध पिलानेके निमित्त रख लिया। जो उस बालककी माता थी वही दूध पिलाई दाई बन गई। इस बच्चेको अत्यंत प्रेम सहित पालने लगी। इस बच्चेका नाम मूसा रक्खा गया मिसरी भाषामें मूसाके अर्थ जलसे निकलाके होते हैं। मूसा इस राजकुमारीका मुंहबोला पुत्र होकर पलने लगा। जब फ़िरऊनने उस बालकको देखा तब ज्योतिषियों से पूछा कि, इस लड़केका हाल कहो कि, कैसा है? तब ज्योतिषियोंने कह दिया कि, यह वही बालक है जो तुझे तथा तेरे राज्यको चौपट करेगा। यह बात सुनकर फ़िरऊन उस बालकके मारनेपर प्रस्तुत हुवा। पर उसकी पुत्रीने उसकी ओरसे निवेदन किया कि, यह अनजान बालक है यह आपका कोई दोष नहीं करेगा। समस्त ज्योतिषी झूठे हैं। तात्पर्य यह कि, अपनी पुत्रीके कहने सुननेसे उस बालककी हत्या नहीं की। एक दिन फ़िरऊनने मूसाको अपना नाती समझ अपने क्रोडमें प्यार करने लगा। इतनेमें मूसाने फ़िरऊनकी दाढ़ीको पकड़कर इतने जोरसे खींचा कि, फ़िरऊनके नेत्रोंसे जल निकलने लगा। इस पर उसको निश्चय हो गया कि, यह बालक मेरा बँरी है। आज्ञा दी कि, इसका बध करो। तब पुनः फ़िरऊनसे लड़कीने प्रार्थना की कि, यह अनजान बालक है। यह मैंत्री अथवा द्वेष क्या जाने इस अनजानको न मारिये। फ़िरऊनने कहा कि, यदि यह अनजान बालक है तो इसकी परीक्षा ली जावे। इस बालकके सामने दो ढेर लगा दिये एक तो अग्निके लाल कोयलोंका और दूसरा लाल लालोंका ढेर लगा दिया और कहा कि, यदि यह बच्चा लाल अङ्गारोंके ढेर पर हाथ डालेगा तो मैं समझूंगा कि, यह बच्चा अबोध है, यदि इसने लालोंको पकड़ा तो बेसुध नहीं है इस कारण यह मारा जावेगा। जब दोनों ढेर मूसाके सामने लगाये गये मसाने चाहा कि, लालोंके ढेरपर हाथ डालें। तब परमेश्वरकी ओरसे इतने गुप्तरीतिसे मूसाका हाथ पकड़कर शीघ्रतापूर्वक अग्निपर डाल दिया। उस अग्निमेंसे एक अङ्गारा पकड़कर मूसाकी जिह्वापर रख दिया। उसकी जिह्वा जल गई। इसी कारण मूसाकी जिह्वा तोतली हो गई। फ़िरऊनने जान लिया कि, वास्तवमें यह अबोध बालक है, मूसाकी हत्या नहीं की। उस बच्चेका लालन पालन होने लगा। फ़िरऊनकी पुत्रीने उसके पढ़ानेके निमित्त एक शिक्षक रक्खा, वो भली भाँति शिक्षा पाने लगा, अत्यंत सावधानीपूर्वक पाला गया, फ़िरऊनके नातीके