कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextसुदर्शन है, काशी नगरीमें रहता है उसको ले आओ, जब वह आकर तुम्हारे गृहमें भोजन करेगा, उस समय तुम्हारी यज्ञ पूरी होगी सात बार आकाशी घण्ट बजेगा । बिना सुदर्शनके भोजन किये आसमानी घण्ट कदापि न बजेगा न यज्ञही पूरी होगी । तब युधिष्ठिरने कहा कि, हे महाराज ! भङ्गीको ऐसी बड़ाई कैसे मिली ? ऐसे बड़े बड़े महात्मा एकत्रित हुये, इनमें कोई इस योग्य नहीं ? यह क्या बात है ? श्रीकृष्णने कहा कि, हे युधिष्ठिर ! मेरा कहना मान ले श्वपच सुदर्शनको यहाँ लेआओ । पीछे भीमसेनको श्वपच सुदर्शनके बुलानेके लिये भेज दिया ।
भीमसेन सुदर्शनजीको बुलाने चले । काशी नगरीमें जा पहुँचे । दृढ़ते दृढ़ते श्वपच सुदर्शनका मकान पाया । जाकर सुदर्शन जीसे ! कृष्ण तथा युधिष्ठिरका समाचार पहुँचाया । भीमने कहा कि, हे सुदर्शनजी ! आपको कृष्ण तथा युधिष्ठिरने बुलाया है । आप मेरे साथ चलिये । हमारे यज्ञमें भोजन कीजिये, आपके भोजन करनेसे यदि घण्ट बज जायगा तो हमारी यज्ञ पूर्ण हो जायगी । राजा युधिष्ठिर आपपर बड़े प्रसन्न होंगे, एवं बड़ा अनुग्रह करेंगे । ऐसा सुनकर सुदर्शनजीने उत्तर दिया कि, हे भीमसेन ! तुम राजाके पासजाकर कहो कि, हम राजाके घरका भोजन न करेंगे ।
चौ०—भीम कहो राजासे जाई । राजा घर भोजन नहीं पाई ।
राजा वेश्या^१^ जात शिका^२^री । महा अक^३^र्मी विषय विक^४^ारी ॥
सतसठ दूत^५^ कर्म इन सङ्ग^६^। भोजन करत सत्य हो भङ्गा^७^ ।
राजा वेश्या छु^८^चे न कोई । इनके छुए^९^ पाप बड़ होई ॥
राजाद्वार^१०^ भोजन जो पावे । अरु वेश्या^११^ही छुये नरक महाँ जावे ॥
राजा धीमर वेश्यापा^१२^सी । इनके छुये यमपुर जासी^१३^ ॥
साखी—चार^१४^ जातिके दर्शन, दूरते कीजे जान^१५^ ।
इनके घर भोजन किये, पडे नरककी खान^१६^ ॥
इतनी बातके सुनतेही भीमसेन तो जल गये । मनमें सोचने लगे कि, यह नीच मुझको ऐसी बात कहता है । यदि मैं इसको एक गदा मारूँ तो यह पातालको चला जावे । जब भीमसेनने अपने मनमें यह विचार किया, तब श्वपच सुदर्शनजी महाराजने भीमसेनके अन्तःकरणकी बातोंको जानकर
१ करेंगे । २ रंठी । ३ जीर्वाहसक । ४ बुरे कर्म करनेवाले । ५ विषयी । ६ चुगलखोर । ७ सात । ८ नष्ट । ९ स्पर्श । १० स्पर्श किये । ११ राजेके घर । १२ वेश्याके । १३ एक, प्रकारके जीवहत्यारे । १४ जायेगा । १५ राजा, १४ धीमर, वेश्या और पाशी । १६ मत । १७ कुण्ड ।