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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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पश्चिमकी पुस्तकें ।

मूसाकी पुस्तक — खून मत करो । तौरीतकी आज्ञा है कि, खून मत करो ।
समीक्षा — अब विचार करना चाहिये, जिसमें खून हो उसका खून न करना यदि ऐसी आज्ञा मिली तो इससे साबित हुआ कि खूनवालेके अतिरिक्त जिसमें कि, खून नहीं है उन्हें प्रयोगमें ला सकते हो जैसे साग, पात, फल फूल इत्यादि इससे उसके खानेकी आज्ञा साबित होती है रक्तवाले जितने जीवधारी हैं सब परस्परमें भाई हैं जो रक्तवाले नहीं हैं उनके बारेमें कोई ऐसा नहीं कहता कि, इनका खून मत करो क्योंकि, उनकी उत्पत्ति वीर्यसे नहीं, न उनमें लोहही है, उनकी उत्पत्ति मिट्टी और पानीसे है । इसीलिये वे सब मनुष्यके भक्ष्य हैं पर जो रक्तवाले हैं वे चाहे कहींसे हुए हों मनुष्यको न तो मारने चाहिये न खानेही चाहिये ।

मूसाके धर्मका नियम तो यही हुआ था कि, “खून मत करो” फिर कुर्बानीका प्रचारक उसे नहीं माना जा सकता ।

कुर्बानीके प्रचारक ।

सोखतनी कुर्बानी, खताकी कुर्बानी और इन्सानकी कुर्बानी करनेको किसने कहा । नूहने सोखतनी कुर्बानीकी पीछे दूसरोंने इब्राहीमको इन्सानकी कुर्बानी मनुष्यको बधकी आज्ञा हुई पर दया करके क्षमा कर दिया । इनका खुदा सर्वदास कुर्बानियोंका आदी है । पहिले कहता है कि खून मत करो, पीछे धोखा देकर कुर्बानी कराता है । इसके कपट जालसे हंस कबीरके सिवा दूसरा कोई नहीं बच सकता । प्रलयके पीछे नूह पृथिवीपर उतरा उसने पशुओंको जलाकर सोखतनी कुर्बानी की उसके सृष्टनेके वास्ते खुदा आसमानसे उतरा जलते हुये पशुओंकी सुगन्धी (दुर्गन्धि) को सृष्टकर खुश हुआ नूहको बरकत दी ।

समीक्षा — विचारवान् न्यायी लोग विचार करें कि, जब हाड, चाम, मांस, लोह जलता है तो सुगन्धी आती है अथवा दुर्गन्धी आती है । उसमें तो इतनी दुर्गन्धी आती है कि, उसको मनुष्य किसी प्रकार सहन नहीं कर सकता । ऐसी घृणित दुर्गन्धीको सुगन्धी जानकर सृष्टता एवं उससे प्रसन्न होता है, उस खुदासे ईश्वर रक्षा करे यह तो राक्षसोंके भी बाबा निकले । जिस धोखेमें इक्के दुक्के भारतवासी पड़े हैं उसी धोखेमें पश्चिम देशवाले भी पड़े हुए हैं । इसपर किसीने विचार किया है कि, हमारे धर्मकी जड़ अहिंसा है । हिंसा कभी भी धर्म नहीं हो सकता ।

खुदाने आदमको अपने रूपमें बनाया । तौरीतमें पेंदाइशकी किताबका