कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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Read in context४३८ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ श्रीकाली के सम्बन्ध में प्रयुक्त होनेवाले शब्दों का यथार्थ रूप श्मशानवासिनी-भगवती को श्मशानवासिनी भी कहा गया है । श्मशान का जो व्यावहारिक अर्थ होता है (जहाँ शव जलाये जाते हों) वह अर्थ यहाँ नहीं होता । श्मशान का भाव इस प्रकार जानना चाहिए- पंच महाभूत चिद्ब्रह्म में लय होते हैं । आद्याकाली चिद्ब्रह्म स्वरूपा हैं। लय होने के स्थान को श्मशान कहा जाता है । इस प्रकार जिस स्थान पर पंच महाभूत लय हों, वही श्मशान है और भगवती वहीं निवास करती हैं । सांसारिक काम, क्रोध, रागादि जिस स्थान पर भस्म होते हैं वह भी श्मशान है । इनके भस्म होने का स्थान मन है । जो मन काम, क्रोध, रागादि से रहित हो उसी श्मशान के समान मन में भगवती काली निवास करती हैं। अतःकाली के उपासकों को चाहिए कि वे अपने हृदय में काली को स्थापित करने से पूर्व उसे श्मशान के समान अर्थात् समस्त रागों से मुक्त बना लें । श्मशान में चिता-श्मशान में चिता के जलाने का अर्थ है-हृदय में ज्ञानाग्नि का निरन्तर बने रहना । अतः साधक को अपने श्मशानवत् हृदय में ज्ञानरूपी चिता को सदा जलाये रहना चाहिए । भगवती का आसन-भगवती का आसन शव का कहा गया है । इसका अर्थ यह है कि जब शिव से शक्ति अलग होती है 'शिव' शव रह जाता है । उस स्थिति में भगवती उसके ऊपर अपना आसन करती हैं अर्थात् उस पर अपनी कृपा करती हैं और उसे स्वयं में मिलाकर उसे भौतिक संसार से मुक्त कर देती हैं ।