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कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariHindipublished259 pages

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पंचम अध्याय ] [ २६१ वे राजागण विविध प्रकार के वस्त्राभूषण, माला आदि से विभूषित होकर रगभूमि मे आकर सादर सम्मानित होते हुए सुखपूर्वक अपने-२ अपने स्थान पर बैठ गये ।१४। विभिन्न प्रकार के भोगो और ऐश्वर्य से सम्पन्न, रमणीय, चरित्र वाले एव सब को प्रसन्न करने के स्वभाव वाले राजाओ को देखकर सिंहलेश बृहद्रथ ने अपनी वरवर्णिनी कन्या को स्वयवर मे बुलाया ।१५। गौरी, चन्द्रानना, श्यामा मणि-मोती रत्नो आदि से सब प्रकार विभूषित, अत्यन्त सुन्दर हार को धारण किये हुए वह पद्मावती मोहमयी माया अथवा कामदेव की साक्षात् पत्नी ही अव- तरित हुई प्रतीत होने लगी । मैं स्वर्ग, मर्त्यलोक, पाताल सभी लोको मे तो गमन करता हूँ । परन्तु ऐसी रूप लावण्य वाली कोई अन्य कन्या मैंने कही भी नही देखी । उस कन्या के पीछे दासियां चल रही थी तथा उसके चारो ओर सखियां थी ।१६-१८। दौवारिकैर्वेत्रहस्तै शासितान्तः पुराद्बहिः । पुरोबन्दिगणाकीर्णा प्रापयामास ता शनैः ।१९। नूपुरैः किङ्किणीमिश्र क्वणन्ती जनमोहिनीम् । स्वागताना नृपाणाञ्च कुल शील गुणान्बहून ।२०। शृण्वन्ती हसगमना रत्नमालाकरग्रहा । रुचिरापाङ्गभङ्गेन प्रेक्षन्ती लोलकुण्डला ।२१। नृत्यत्कुन्तलसोपान गण्ड मण्डल मडिता । किञ्चित्स्मेरोल्लसद्द्रकदशनद्योतदीपिता ।२२। वेदीमध्यारुणा क्षौमवसना कोकिलस्वना । रूप लावण्य पण्येन क्रतुकामा जगत्त्रयम् ।२३। समागता तां प्रसमीक्ष्य भूपाः समोहिनी काम विमूढ चित्ताः । पेतुः क्षितौ विस्मृतवस्त्रशस्त्रा रथाश्वमत्तद्विपवाहनास्ते ।२४। नगर के बाहर दौवारिकगण हाथो मे बेत लिए हुए अन्त पुर के शासन मे सलग्न थे । सभास्थल के अगले भाग मे बंदीगण खडे थे । उस रग भूमि मे राजकुमारी पद्मा मदगति से प्रविष्ट हुई ।१९। नूपुर और