BharatKosha
कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)

कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)

by महाकवि सोमदेव भट्ट

Source: कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1961 (origin)

DevanagariHindipublished1,079 pages

Page 360 of 1079

Read in context
Page 360

षष्ठ लम्बकः ३२९ 'सूर्यप्रभ यह अनन्त फलशाली धनुष रत्न तुझे सिद्ध हो गया और इसके साथ कभी न टूटनेवाली डोरी भी तुझे प्राप्त हो गई। ये दोनों रत्न तुझे सिद्ध हुए, अब इन्हें स्वीकार कर' ॥१५-१६॥ इस प्रकार की आकाशवाणी सुनकर सूर्यप्रभ ने उन दोनों रत्नों को ग्रहण कर लिया और श्रुतशर्मा भी व्याकुल होकर अपने अनुचरों के साथ निराश होकर तपोवन को चला गया। तदनन्तर मय सुनीथ सूर्यप्रभ आदि सभी प्रसन्न हुए ॥१७॥ उस धनुष की उत्पत्ति के सम्बन्ध में सुमेरु ने कहा— यहाँ पर वायु से दग्ध करनेवाले बाँसों का एक महान् और दिव्य जंगल है, उससे काटकर जो बड़े-बड़े बाँस इस सरोवर में फेंके जाते हैं, वे सभी दिव्य धनुष बन जाते हैं। उन्हीं धनुषों को पहले समय में देवताओं ने असुरों ने गन्धर्वों ने तथा विद्याधरों ने अपने लिए सिद्ध किया है ॥१८-१ ९ ॥ उनके अलग-अलग नाम हैं। इस सरोवर में पुराने समय में देवताओं ने अमृतबल नाम के धनुष भी छोड़े हैं, जो चक्रवर्तियों के धनुष हैं। वे बड़े ही कष्ट से किसी भावी चक्रवर्ती को ईश्वर की कृपा होने पर ही सिद्ध होते हैं ॥१ ९-१०२॥ वही चक्रवर्ती धनुष आज सूर्यप्रभ को सिद्ध हुआ है। उसके ये प्रभास आदि मित्र भी अपने अपने योग्य धनुषों की साधना करें ॥१ १॥ जिन सिद्धविद्य कुशाग्र वीरों की योग्यता होती है, उन्हें आज भी उन धनुषों की सिद्धि प्राप्त होती है ॥१ २॥ सुमेरु के वचन सुनकर सूर्यप्रभ के मित्र प्रभास आदि बाँसों के जंगल में गये और उस जंगल के रक्षक चंड-दंड को जीतकर वहाँ से बाँस लाये और उन्हें सरोवर में फेंक दिया ॥१०५-१ ६॥ इसके बाद सूर्यप्रभ के मित्रों ने सरोवर के किनारे बैठकर जप और हवन प्रारम्भ किया। उन शस्त्रशाली मित्रों को सात दिन में धनुष सिद्ध हो गये ॥१ ७॥ सात दिनों के पश्चात् सिद्ध हुए मित्रों से धनुष-सिद्धि का समाचार जानकर सूर्यप्रभ उन मित्रों और मय आदि के साथ सुमेरु के तपोवन में लौट आये ॥१ ८॥ वहाँ पर सुमेरु ने उनसे कहा कि तुम्हारे मित्रों ने वेणु-दंड के रक्षक चंड-दंड को जीत लिया, यह आश्चर्य की घटना है ॥१ ९॥ ४२

कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८) · Page 360 of 1079 · BharatKosha