कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)
by महाकवि सोमदेव भट्ट
Source: कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1961 (origin)
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नवम तरंग १८९-२२७ नरवाहनदत्त का साहस १८९ राज्यधर बढ़ई की कथा १९१ मानपरा और अर्थलोभ की कथा १९९ नरवाहनदत्त का कर्पूरसम्भव द्वीप के प्रति प्रस्थान २ ०७। सूर्यप्रभ नामक षष्ठम लम्बक २२९-४४९ प्रथम तरंग २२९-२५७ मंगलाचरण २२९ नरवाहनदत्त की कथा २२९ चन्द्रप्रभ से कथित आत्म वृत्तान्त २२९ सूर्यप्रभ का चरित्र २३१। द्वितीय तरंग चन्द्रप्रभ की सभा में मय दानव का आगमन २५७ सूर्यप्रभ के दरबार मे नारद मुनि का आगमन २५९ काण ब्राह्मण की कथा २६९ कलावती की कथा २८३ महस्तिका का प्रेम २८९। तृतीय तरंग ३१५-३४९ सूर्यप्रभ का उद्योग ३१५। चतुर्थ तरंग ३४९-३६७ सूर्यप्रभ का रणभूमि में सेना का उतारना ३४९ रानियों द्वारा सूर्यप्रभ की तथा मय की चर्चा ३६३। पंचम तरंग ३६७-३८५ सूर्यप्रभ-चरित रणभूमि में संग्राम ३६७ शरभानना योगिनी के पराक्रम की कथा ३८३। षष्ठ तरंग ३८७-४२१ सूर्यप्रभ-चरित ३८७ गुणशर्मा ब्राह्मण की कथा ३८७ गुणशर्मा का जन्म वृत्तान्त ४ ० । सप्तम तरंग ४२१-४४९ सूर्यप्रभ का वृत्तान्त अन्तिम युद्ध ४२१। अलंकारवती नामक नवम लम्बक ४५१-४८१ प्रथम तरंग ४५१-४८१ मंगलाचरण ४५१ नरवाहनदत्त की कथा ४५१ अलंकारवती की कथा ४५३ राम और सीता की कथा ४५९ राजा पृथ्वीरूप और रानी रूपलता की कथा ४६७ नरवाहनदत्त और अलंकारवती का विवाह ४७९।