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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

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प्र० २५ अ० ९ ] उच्चाधिकारियों की परीक्षा ११५

(१) यश्चैषां यथादिष्टमर्थं सविशेषं वा करोति स स्थानमानौ लभेत । (२) अल्पायतिश्चेन्महाव्ययो भक्षयति । विपर्यये यथायतित्त्वव्ययश्च न भक्षयति इत्याचार्याः अपसर्पेणैवोपलभ्यते इति कौटिल्यः । (३) यः समुदयं परिहापयति स राजार्थं भक्षयति । स चेदज्ञानादिभिः परिहापयति तदेनं यथागुणं दापयेत् । (४) यः समुदयं द्विगुणमुद्भावयति स जनपदं भक्षयति । स चेद् राजार्थमुपनयत्यल्पापराधं वारयितव्यः । महति यथापराधं दण्डयितव्यः । (५) यः समुदयं व्ययमुपनयति स पुरुषकर्माणि भक्षयति । स कर्म-दिवसद्रव्यमूलपुरुषवेतनापहारेषु यथापराधं दण्डयितव्यः ।

सकते हैं । यदि उच्चपदस्थ कर्मचारी अपने कार्यों में प्रमाद करें तो उन पर उनके वेतन का दुगुना दण्ड किया जाय ।

( १ ) जो पदाधिकारी आदिष्ट कार्य को पूरा करके, स्वेच्छया किसी दूसरे हित-कर कार्य को भी करता है, उसे तरक्की और सम्मान दिया जाना चाहिए ।

( २ ) कुछ पुरातन आचार्यों का कहना है कि 'यदि किसी अध्यक्ष की आमदनी थोड़ी और खर्च अधिक दिखाई दे, तो समझ लेना चाहिए कि वह राज्य के धन का अपहरण करता है । यदि जितनी आमदनी है, उतना ही व्यय दिखाई दे तो समझना चाहिए कि वह न तो राजधन का गबन करता है और न रिश्वत लेता है ।' किन्तु आचार्य कौटिल्य का कथन है कि 'धन का अपहरण करनेवाला भी थोड़ा खर्च कर सकता है । अतः गुप्तचरों द्वारा ही इस कार्य का ठीक पता लग सकता है ।'

( ३ ) जो अधिकारी नियमित आय में कमी दिखाता है, वह निश्चय ही राज-धन का अपहरण करता है । यदि उसकी अज्ञानता, प्रमाद एवं आलस्य के कारण हुई है तो उसे अपराध के अनुसार दुगुना, तिगुना दण्ड दिया जाना चाहिये ।

( ४ ) जो अधिकारी नियमित आय से दुगुनी आय दिखाता है, वह निश्चय ही प्रजा को पीड़ित कर इतना धन वसूल करता है । यदि वह उस दुगुनी आमदनी को राजकोष के लिए भेज देता है तो उसे इतना ही दण्ड देना चाहिए, जिससे कि आगे ऐसा अनुचित कार्य न कर सके । यदि वह उस अधिक धन को राजकोष के लिए न भेज कर स्वयं ही खा लेता है तो उसे अपराध के अनुसार कठोर दण्ड दिया जाना चाहिए ।

( ५ ) जो अधिकारी व्ययनिमित्त निर्धारित राशि को खर्च न करके बचा लेता है वह मजदूरों का पेट काटता है । उस अपराधी अधिकारी को, कार्यहानि के मूल्य का तथा मजदूरी के अपहरण का, यथोचित दण्ड दिया जाना चाहिए ।

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