कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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Read in contextप्र० ६८ : अ० १२ ] धरोहर-सम्बन्धी नियम ३०७
(१) स्थावरस्तु प्रयासभोग्यः फलभोग्यो वा। प्रक्षेपवृद्धिमूल्यशुद्ध-माजीवममूल्यक्षयेणोपनयेत् । (२) अनिसृष्टोपभोक्ता मूल्यशुद्धमाजीवं बन्धं च दद्यात् । शेषमुप-निधिना व्याख्यातम् । (३) एतेनादेशोऽन्वाधिश्च व्याख्यातौ । सार्थेनान्वाधिहस्तो वा प्रदिष्टं भूमिमप्राप्तश्चोरैर्भग्नोत्सृष्टो वा नान्वाधिमभ्यावहेत् । अन्तरे वा मृतस्य दायादोऽपि नाभ्यावहेत् । शेषमुपनिधिना व्याख्यातम् । (४) याचितकमवक्रीतकं वा यथाविधं गृह्णीयुस्तथाविधमेव अर्पयेयुः । श्लेषोपनिपाताभ्यां देशकालोपरोधि दत्तं नष्टं विनष्टं वा नाभ्याभवेयुः । शेषमुपनिधिना व्याख्यातम् । (५) वैयापृत्यविक्रयस्तु—वैयापृत्यकरा यथादेशकालं विक्रीणानाः पण्यं यथाजातं मूल्यमुदयं च दद्युः । शेषमुपनिधिना व्याख्यातम् ।
( १ ) जो स्थायी संपति परिश्रम या बिना ही परिश्रम फल देती हो अथवा उपभोग करने योग्य हो, उसे बेचा नहीं जा सकता है, जिस आधि को उत्तमर्ण व्यापार में लगाये उसका लाभ अधमर्ण को दिया जाना चाहिए ।
( २ ) जो व्यक्ति बिना आज्ञा या शर्त के आधि का उपभोग करे, उससे आधि के अच्छी हालत का मूल्य वसूल किया जाय और अलग से उस पर जुर्माना किया जाय । आधि के सम्बन्ध में शेष नियम उपनिधि के समान हैं ।
( ३ ) आदेश और अन्वाधि : आदेश ( आज्ञा ) और अन्वाधि ( गिरवी रखी हुई वस्तु को वापिस मँगाना ) के सम्बन्ध में उपर्युक्त नियम समझने चाहिए । व्यापारी यदि किसी की गिरवी रखी वस्तु को किसी व्यक्ति के द्वारा कहीं दूसरी जगह भेजे और बीच ही में उस वस्तु की चोरी हो जाय तो उसे ले जाने वाले पर आधि विषयक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है । यदि किसी कारण वह बीच रास्ते में ही मर जाय तो उसके उत्तराधिकारियों पर भी मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है । बाकी सब नियम उपनिधि के समान हैं ।
( ४ ) उधार ली गई वस्तु को लौटाना : उधार या किराये पर ली गई वस्तु जिस दशा में लायी जाय ठीक उसी दशा में वापिस करनी चाहिए । यदि देश, काल, दोष या आकस्मिक आपत्ति के कारण उस वस्तु में कोई खराबी आ जाय या सर्वथा वह नष्ट हो जाय, तो उस वस्तु के सम्बन्ध में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है । शेष नियम उपनिधि के समान समझने चाहिए ।
( ५ ) फुटकर वस्तुओं को बेचने का नियम : फुटकर वस्तुओं को बेचने वाले व्यापारियों को चाहिए कि वे देश, काल के अनुसार अपनी वस्तुओं को बेचते