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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

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३४६कौटिल्य का अर्थशास्त्र[ चौथा अधिकरण

(१) तन्तुवाया दशैकादशिकं सूत्रं वर्धयेयुः। वृद्धिच्छेदे छेदद्विगुणो दण्डः।
(२) सूत्रमूल्यं वानवेतनम्। क्षौमकौशेयानामध्यर्धगुणम्। पत्रोर्णा-कम्बलदुकूलानां द्विगुणम्।
(३) मानहीने हीनावहीनं वेतनं तद्द्विगुणश्च दण्डः। तुलाहीने हीन-चतुर्गुणो दण्डः। सूत्रपरिवर्तने मूल्यद्विगुणः। तेन द्विपटवानं व्याख्यातम्।
(४) ऊर्णातुलायाः पञ्चपलिको विहननच्छेदो रोमच्छेदश्च।
(५) रजकाः काष्ठफलकश्लक्ष्णशिलासु वस्त्राणि नेनिज्युः। अन्यत्र नेनिजतो वस्त्रोपघातं षट्पणं च दण्डं दद्युः।
(६) मुद्गराङ्कादन्यद् वासः परिदधानास्त्रिपणं दण्डं दद्युः। परवस्त्र-विक्रयावक्रयाधानेषु च द्वादशपणो दण्डः। परिवर्तने मूल्यद्विगुणो वस्त्र-दानं च।


( १ ) जुलाहा : जुलाहा (तंतुवाय) को चाहिए कि वह प्रति दस पल पर एक पल अधिक सूत, कपड़ा बुनने के लिए ले। यदि वह इस से अधिक छीजन निकाले तो उस पर छीजन का दुगुना जुरमाना किया जाय।

( २ ) जितने कीमत का सूत हो उतनी ही उसकी बुनाई भी देनी चाहिए; जूट और रेशमी कपड़ों की बुनाई सूत से ड्योढ़ी दी जाय। धुले हुए रेशमी कपड़ों (पत्रोर्ण), ऊनी कंबलों और दुशालों की बुनाई सूती कपड़े से दुगुनी देनी चाहिए।

( ३ ) जितने नाप का कपड़ा बुनने को दिया गया हो यदि बुनकर उतना न निकले तो उसी हिसाब से जुलाहे की मजदूरी काटी जाय और उस पर उस कम बुनाई का दुगुना जुरमाना किया जाय। यदि सूत तौलकर दिया गया हो तो बुने हुए कपड़े में जितनी कमी निकले उसका चौगुना दण्ड जुलाहे को दिया जाय। यदि वह सूत को ही बदल दे तो उस पर मूल्य से दुगुना दण्ड किया जाय। इसी आधार पर दुसूती कपड़ों की बुनाई भी समझ लेनी चाहिए।

( ४ ) सौ पल वजनी ऊन में से पाँच पल ऊन पिंजाई-धुनाई में कम हो जाता है और पाँच पल ऊन बुनाई के समय रूओं के रूप में उड़ जाती है; अर्थात् धुनाई-बुनाई के समय प्रति सैकड़ा दस पल ऊन कम हो जाती है, इससे अधिक नहीं।

( ५ ) धोबी और दर्जी : धोबियों (रजकों) को चाहिए कि वे लकड़ी के फटे पर या साफ पत्थर पर ही कपड़ों को साफ करें। दूसरी जगह धोने पर यदि कपड़ा फट जाय तो वे उसका नुकसान भरें और दण्ड रूप में छह पण भी अदा करें।

( ६ ) धोबियों के अपने पहिनने के कपड़ों पर मुद्गर का निशान होना चाहिए; जिस धोबी के कपड़ों पर यह निशान न रहे उस पर तीन पण दण्ड किया जाय। जो