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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

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३६२कौटिल्य का अर्थशास्त्र[ चौथा अधिकरण

तस्यायमनर्थः। तेनैनमाहारयस्व' इति। स चेत्तथा कुर्यादुत्कोचक इति प्रवास्येत। (१) कृतकाभियुक्तो वा कूटसाक्षिणोऽभिजातानर्थवैपुल्येन आरभेत। ते चेत्तथा कुर्युः, कूटसाक्षिण इति प्रवास्येरन्। (२) तेन कूटश्रावणकारका व्याख्याताः। (३) यं वा मन्त्रयोगमूलकर्मभिः श्माशानीकैर्वा संवननकारकं मन्येत, तं सत्री ब्रूयात्—'अमुष्य भार्यां स्नुषां दुहितरं वा कामये। सा मां प्रतिकामयताम्, अयं चार्थः प्रतिगृह्यताम्' इति। स चेत्तथा कुर्यात्, संवननकारक इति प्रवास्येत। (४) तेन कृत्याभिचारशीलौ व्याख्यातौ। (५) यं वा रसस्य वक्तारं क्रेतारं विक्रेतारं भैषज्याहारव्यवहारिणं वा रसदं मन्येत, तं सत्री ब्रूयात्—'असौ मे शत्रुस्तस्योपघातः क्रियताम्, अयं चार्थः प्रतिगृह्यताम्' इति। स चेत्तथा कुर्याद्, रसद इति प्रवास्येत।


बहाने इसकी सारी सम्पत्ति लूट लें।' यदि गाँव के लोग या मुखिया वैसा ही करें तो उन्हें उत्कोचक (जनता को कष्ट देकर अपहरण करने वाला) समझकर प्रवासित कर दिया जाय।

(१) बनावटी तौर पर अभियुक्त बना हुआ सत्री संदिग्ध गवाहों को बहुत-सा धन देने का लोभ देकर अपनी ओर से उन्हें झूठी गवाही देने के लिए फुसलायें। यदि वे लोभ में आ जाँय तो उन्हें झूठा साक्षी समझकर प्रवासित किया जाय।

(२) यही नियम झूठे दस्तावेज आदि बनाने वालों के सम्बन्ध में भी समझने चाहिएँ।

(३) जिसको यह समझ लिया जाय कि यह व्यक्ति मन्त्रों, औषधियों या श्मशान की क्रियाओं द्वारा वशीकरण का कार्य करता है, उससे सत्री इस प्रकार कहे कि 'मैं अमुक व्यक्ति की स्त्री' पुत्रवधू या लड़की से प्रेम करता हूँ; इसलिए ऐसा उपाय बताओ कि जिससे वह मेरे वश में हो जाय बदले में इतना धन ले लो।' यदि वह लोभवश वैसा करने को तैयार हो जाय तो उसे वशीकरण करने वाला समझकर प्रवासित कर दिया जाय।

(४) यही नियम उन लोगों के सम्बन्ध से भी समझना चाहिए जो अपने ऊपर देवी-देवता, भूत-प्रेत-पिशाच आदि को बुलाकर प्रजा को कष्ट देते हैं और तन्त्र-मन्त्र आदि प्रयोगों द्वारा लोगों को मारते हैं।

(५) विष के बनाने वाले, खरीदने वाले, बेचने वाले तथा ओषधियों एवं भोज्य सामग्री का व्यापार करने वाले किसी व्यक्ति पर यदि किसी को विष देने का सन्देह हो जाय तो सत्री उससे कहे कि 'अमुक पुरुष मेरा शत्रु है उसे आप विष देकर मार डालिये और बदले में इतना धन ले लीजिए'। यदि वह पुरुष ऐसा ही करे तो उसे विष देने के अभियोग में प्रवासित कर दिया जाय।