BharatKosha
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 516 of 918

Read in context
Page 516

प्रकरण ९४-९५ | अध्याय ६

राज्यप्रतिसन्धानमेकैश्वर्यं च


(१) राजव्यसनमेवममात्यः प्रतिकुर्वीत । प्रागेव मरणाबाधभयाद्राज्ञः प्रियहितोपग्रहेण मासद्विमासान्तरं दर्शनं स्थापयेद् । 'देशपीडापहममित्राप-हमायुष्यं पुत्रीयं वा कर्म राजा साधयति' इत्यपदेशेन राजव्यंजनमनुरूप-वेलायां प्रकृतीनां दर्शयेत् । मित्रामित्रदूतानां च । तैश्च यथोचितां सम्भा-षाम् अमात्यमुखो गच्छेत् । दौवारिकान्तर्वंशिकमुखश्च यथोक्तं राजप्रणिधि-मनुवर्तयेत् । अपकारिषु च हेडं प्रसादं वा प्रकृतिकान्तं दर्शयेत् । प्रसाद-मेवोपकारिषु ।

(२) आप्तपुरुषाधिष्ठितौ दुर्गप्रत्यन्तस्थौ वा कोशदण्डावेकस्थौ कार-येत् । कुल्यकुमारमुख्यांश्चान्यापदेशेन ।

(३) यश्च मुख्यः पक्षवान् दुर्गाटवीस्थो वा वैगुण्यं भजेत तमुपग्राह-येत् । बह्वबाधां वा यात्रां प्रेषयेत् मित्रकुलं वा ।


विपत्तिकाल में राजपुत्र का अभिषेक और एकछत्र राज्य की प्रतिष्ठा

(१) अमात्य को चाहिए कि वह राजा पर आई हुई आपत्तियों का प्रतीकार इन तरीकों से करे—राजा की आसन्न मृत्यु समझ कर राजा के मित्रों एवं हितैषियों की सलाह लेकर महीने-दो महीने बाद राजा के दर्शन की तिथि निश्चित कर दे और यह बहाना बनाये कि आजकल राजा देश की पीड़ा दूर करने वाले, शत्रुनाशक, आयुवर्द्धक और पुत्र देने वाले कर्म का अनुष्ठान कर रहा है । राजा के दर्शन की निश्चित तिथि पर राजा के वेष में किसी दूसरे पुरुष को प्रजा के सामने खड़ा कर दे । मित्रों, शत्रुओं और दूतों को भी उस बनावटी राजा के दर्शन करा दे । उन लोगों के साथ वह राजा अमात्य के माध्यम से ही उचित वार्तालाप करे । पूर्व प्रकाशित राजकार्यों के संबंध में द्वारपाल तथा अंतःपुर रक्षकों के द्वारा ही कहलाये । अपकार करने वाले लोगों पर अमात्य की राय से ही कोप या प्रसन्नता प्रकट करे । उपकार करने वाले लोगों पर सदा प्रसन्न ही बना रहे ।

(२) दुर्ग तथा सीमान्त प्रदेशों की सेना और कोष को किसी बहाने किसी विश्वस्त व्यक्ति की देख-रेख में इकट्ठा करा दिया जाय । किसी दूसरे ही बहाने से राज के सगे-संबंधियों, राजकुमार और अन्य राजप्रमुखों को एकत्र कराया जाय ।

(३) दुर्ग या अटवी में स्थित कोई प्रधान राजकर्मचारी यदि किसी की सहायता

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला) · Page 516 of 918 · BharatKosha