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खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary

by महाकवि श्रीहर्ष

DevanagariHindipublished610 pages

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परिच्छेद ] द्वितीय करणत्व-लक्षण का खण्डन १७७ यदा सम्बन्धीत्यनेन कालविशेषनियतसम्बन्धिता अभिधीयते, ततोऽन्यस्मि- न्नपि काले सम्बन्धिता अयोगव्यवच्छेदपदेन विवक्षितेति चेन्न । सम्बन्धीत्यनेन न कालविशेषनियता सम्बन्धिताऽभिहिता, येन कालान्तरेऽलब्धसम्बन्धताभिधा- नाय पदान्तरमुपादीयेत । अथोच्यते—सम्बन्धीत्यस्य सामान्यतोऽभिधायिनः कालविशेषनियतं सम्ब- न्धमादायपि पर्यवसाने सार्थक्यं भवत्येवेति कालान्तरेऽसम्बन्धितया व्यवतिष्ठ- मानं कत्राद्यपि करणं प्रसज्येत । तद्व्यवच्छेदाय कालान्तरे सम्बन्धिता पदान्तरेणा- भिधीयत इति । मैवम् ; तर्हि तेनापि क्वचिदेव कालान्तरे सम्बन्धिताऽभिधीयेत, तदापि तस्य सार्थकता सम्बन्धिपदन्‍यायेन सामान्याभिधायिनो भवेदिति ततोऽपि कालान्तरे असम्बन्धव्यवच्छेदाय विशेषणान्तरमपि निवशनीयं स्यात् । अथ यदा कदाचिदपि योऽयोगस्तस्य सर्वस्य व्यवच्छेदो विवक्षित इति । समर्थन—'सम्बन्ध' शब्द काल-विशेष से नियत सम्बन्ध का वाचक है । अतः काल- विशेष से अन्य काल में सम्बन्धित्व प्रतिपादन करने के लिए 'अयोगव्यवच्छेद' का लक्षण में निवेश है । खण्डन—'सम्बन्धी' पद से काल-विशेष से नियत सम्बन्ध का अभिधान नहीं होता, किन्तु सामान्यतः सम्बन्ध का अभिधान होता है । अतः सम्बन्धी कहने पर अन्य काल में अयोग प्राप्त नहीं होता, फिर उसके व्यवच्छेद के लिए 'अयोगव्यवच्छेद' पद का उपादान व्यर्थ है । समर्थन—यद्यपि 'सम्बन्धी' पद सामान्यतः सम्बन्धमात्र का अभिधान करता है, तथापि कालविशेष से नियत सम्बन्ध में भी सम्बन्धी पद का पर्यवसान हो सकता है । अतः कदाचित् छिदादि प्रधान क्रिया से असम्बद्ध कर्ता में करणत्व के व्यवच्छेद के लिए अयोगव्यवच्छेद पद का लक्षण में निवेश हो सकता है । खण्डन—जैसे सामान्यतः सम्बन्ध का वाचक 'सम्बन्धी' पद कालविशेष से नियत सम्बन्ध में पर्यवसित होता है, वैसे ही अभावाभाव के प्रतियोगी रूप होने से, सामान्य सम्बन्ध के वाचक 'अयोगव्यवच्छेद' शब्द का भी यदि कालविशेष से नियत सम्बन्ध में ही पर्यवसान मान लें, तो फिर भी कर्ता में अतिव्याप्ति हो जायगी । अतः उसमें अति- व्याप्ति के वारण के लिए अन्य विशेषण का निवेश करना होगा । इस प्रकार उत्तरोत्तर विशेषण-निवेश करने पर अनवस्था हो जायगी । समर्थन—अन्य काल में भी जो अयोग हो, उसका व्यवच्छेद अयोगव्यवच्छेद शब्द का अर्थ है । अतः क्रिया से सार्वकालिक कुठार-सम्बन्ध के लाभ के लिए २३