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खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary

by महाकवि श्रीहर्ष

DevanagariHindipublished610 pages

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Page 295

· २७८ सानुवाद खण्डनखण्डखाद्य [ प्रथम अनवस्थैवं स्यादिति चेत् । न; उपाध्युपन्यास एव कुतोऽनवस्था न स्यात् ? साध्यसामग्र्या उपाधित्वे धूमानुमानसाधारण्यात् । एवं च साध्ये सामग्र्यु- पाधित्वव्यवच्छेदार्थमपि लक्षणं विशेषणीयम् । श्यामत्वादौ साध्ये शाकाद्याहारपरिणतिपारम्पर्यादेस्तस्मिन्साध्ये श्यामत्वादे- रुपाधित्वसम्भवेन कथमुपाधिरपि साधयितुं शक्यत इति चेत् । मैवम्; प्रत्येकं द्वयोरपि मैत्रतनयत्वादिना साधने साधनाऽव्यापकत्वस्य शङ्कितुमशक्यत्वात् । अन्यथा सकर्तृकत्वे साध्येऽदृष्टजत्वं अदृष्टजत्वे च सकर्तृकत्वमुपाधिरित्युभयासिद्धिः स्यात् । एवं बुद्धिमत्पूर्वकत्वे प्रयत्नवत्पूर्वकत्वं प्रयत्नवत्पूर्वकत्वे बुद्धिमत्पूर्वकत्वम्, एवं वह्नित्वजात्याक्रान्तवत्त्वेऽपि इन्धनत्वजात्याक्रान्तत्वं तस्मिन् वह्नित्वजात्या- क्रान्तवत्त्वमुपाधिः स्यादित्यत्राऽपि विश्वमनुमानं व्याकुलं स्यात् । यदि कहें कि 'तत्सामग्री से तत्साधनाव्यापकत्व का अनुमान करेंगे, तो साधन की अनवस्था है, तो उपाधि के साधनाव्यापकत्व के साधन में उपाधि एवं उस उपाधि के साधनाव्यापकत्व के साधन में उपाधि—इस रीति से उपाधि के उपन्यास में भी अनवस्था हो जायगी । किञ्च—यदि साध्यसामग्री को भी उपाधि मानें, तो 'पर्वतो वह्निमान् धूमात्' यहाँ भी वह्निसामग्री उपाधि होने से अनुमितिमात्र का उच्छेद हो जायगा । अतः उपाधि के लक्षण में साध्यसामग्रीभिन्नत्व का निवेश करना होगा । एवञ्च मैत्रतनयत्व से शाकपाक- जत्व के अनुमान में 'शाकपाकसामग्री' उपाधि न हो सकने से शाकपाकजत्व साधन का व्यापक हो जायगा, तो वह उपाधि नहीं हो सकता । समर्थन—मैत्रतनयत्व से श्यामत्व के साधन में शाकपाकजत्व उपाधि है तथा शाकपाकजत्व के साधन में श्यामत्व उपाधि है । अतः उपाधि का अनुमान न हो सकने से उपाधि में साधनाव्यापकत्व युक्त ही है । खंडन—दोनों का एक काल में ही मैत्रतनयत्व से साधन होने से शाकपाकजत्व में साधन-व्यापकत्व है ही । अतः साधनाव्यापकत्व की शङ्का हो ही नहीं सकती । ऐसे स्थलों में यदि एक साध्य की सिद्धि में अन्य उपाधि दें, तो क्षिति में कार्यत्व से सकर्तृकत्व के साधन में 'अदृष्टजत्व' तथा अदृष्टजत्व के साधन में 'सकर्तृकत्व' भी उपाधि होने से दोनों की असिद्धि हो जायगी । एवं बुद्धिमत्पूर्वकत्व के के साधन में प्रयत्नपूर्वकत्व तथा प्रयत्नपूर्वकत्व के साधन में बुद्धिमत्पूर्वकत्व उपाधि होने से दोनों की असिद्धि हो जायगी । एवं वह्नित्वरूप से वह्नि की अनुमिति में इन्धनज तेज को तथा इन्धनज तेजस्वरूप से वह्नि के साधन में वह्नित्वरूप से वह्नि उपाधि होने से

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