लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
by भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा
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Read in contextजोडा होगा, वही लब्धिमें दो युक्त पदसे गुणा करके तीनका भाग दे तब निश्चय करके जोडे हुए अंकोंका जोड हो जाता है ॥ ३३ ॥ उदाहरणम्- एकादीनां नवान्तानां पृथक्संकलितानि मे ॥ तेषां संकलितैक्यानि प्रचक्ष्व गणक द्रुतम् ॥ १ ॥ अन्वयः-हे गणक! एकादीनां नवान्तानां सङ्कलितानि मे पृथक् वद । तेषां सङ्कलि- तैक्यानि च पृथक् द्रुतं प्रचक्ष्व ? ॥ १ ॥ अर्थः-हे ज्योतिषिक ! एकसे लेकर नौ ९ तक अलग २ लिखे हुए अंकोंका जोड मुझसे कहो और उन्हीं एकसे लेकर नौ ९ तक अंकोंके जोडका जोड (अर्थात् एकतकका जोड, दोतकका जोड, तीनतकका जोड, चारतकका जोड, पाँचतकका जोड, छतकका जोड, साततकका जोड, आठतकका जोड, नौ ९ तकका जोड इन सब जोडोंका इकट्ठा अलग २ जोड) कहो ? ॥१॥ न्यासः-१ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ संकलितानि १ ३ ६ १० १५ २१ २८ ३६ ४५ एषामैक्यानि १ ४ १० २० ३५ ५६ ८४ १२० १६५ फैलाव-यहाँ अन्तका अंक नौ ९ है इस कारण उसका नाम पद है. पद ९ नौमें एक १ जोडा तब १० दश हुए, इनको पदके आधे ९/२ से गुणा किया तब ९०/२ ऐसा हुआ. यहाँ अंशमें हरका भाग दिया तब ४५ पैंतालीस लब्धि हुए, यही एकसे लेकर नौतक अंकोंका जोड हुआ. इसी प्रकार एकतकका, दोतकका, तीनत- कका, चारतकका, पांचतकका, छतकका, साततकका, आठतकका, नौतकका, जोड क्रमसे १ ३ ६ १० १५ २१ २८ ३६ ४५ हुआ. फिर इन जोडोंका भी अलग २ एक राशितकका, दोतकका, तीनतकका, चारतकका, पांचतकका, छतकका साततकका, आठतकका नौतकका जोड जानना है, इस कारण ऊपर कही हुई रीतिके अनुसार लब्धि (जोड) ४५ को दो २ से युक्त पद ९ नौसे अर्थात् ग्यारह ११ से गुणा किया तब ४९५ इतने हुए, इनमें तीन ३ का भाग लिया तब एकसौ पैंसठ १६५ हुए, यह नौतकके जोडोंका जोड हुआ. इसी रीतिके करनेसे पहले जोडकी राशियोंमें एकतकका दोतकका, तीनतकका, चारतकका, पांचतकका, छतकका, साततकका, आठतकका, नौतकका क्रमसे १ ४ १० २० ३५ ५६ ८४ १२० १६५ जोड हुआ. इसी प्रकार जितने अङ्क हों सबक' संकलन मालूम हो सकता है ॥