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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

DevanagariSanskritpublished404 pages

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र्दशीको मनुष्यदेहमें प्रवेश करते हैं। तिथि कहनेका यह प्रयोजन है कि, जिस जिस तिथिको जो ग्रह मनुष्यको ग्रस्त करे उसको उसी तिथिमें शांतिके निमित्त बलिदाना- दिक कराने चाहिये । शंका-क्योंजी ! जब ग्रहग्रस्त मनुष्योंको उन्माद होता है तो वह ग्रह मनुष्य देहमें प्रवेश करते क्यों नहीं दीखते हैं ? इसवास्ते उत्तर कहते हैं- दर्पणादीन् यथा छाया शीतोष्णं प्राणिनो यथा । स्वमणिं भास्करांशुश्च यथा देहं च देहधृक् । विशन्ति न च दृश्यन्ते ग्रहास्तद्वच्छरीरिणाम् ॥ ३१ ॥ जैसे दर्पणमें मनुष्यका प्रतिबिम्ब पडे है, आदिशब्द इस जगह प्रकारवाची है अर्थात् जल, तैल आदिमें जैसे छाया पडती है और सरदी, गरमी जैसे मनुष्योंको लगती है अथवा जैसे सूर्यकिरण सूर्यकान्तमणि ( आतसीकाच ) में प्रवेश करे है अथवा जैसे जीव देहमें प्रवेश करे है, इसी प्रकार सब ग्रह मनुष्यके शरीरमें प्रवेश करते हैं परन्तु दीखते नहीं हैं। इस श्लोकके पोषक दृष्टान्त जैज्जट आचार्यने बहुत दिये हैं परन्तु ग्रन्थ बढनेके भयसे नहीं लिखे ॥ इस उन्मादरोगमें सर्वत्र देवशब्दकरके देवताओंकेसे आचरणवाले देवताओंके अनुचर ( दास ) जानने चाहिये, क्योंकि देवताओंको मनुष्यके अपवित्र देहमें प्रवेश होना असम्भव है। सो सुश्रुतमें लिखा है-- न ते मनुष्यैः सह संविशन्ति न वा मनुष्यान् कचिदाविशन्ति । ये त्वाविशन्तीति वदन्ति मोहात्ते भूतविद्याविषयादपोह्याः ॥ ३२ ॥ तेषां ग्रहाणां परिचारका ये कोटीसहस्रायुतपद्मसंख्याः । असृग्वसामांसभुजः सुभीमा निशाविहाराश्च तथा विशंति ॥ ३३ ॥ जो देवादिक मनुष्यके साथ मिलते नहीं हैं न वे मनुष्योंकी देहमें प्रवेश करते हैं और जो वैद्य ' प्रवेश करते हैं ' ऐसे कहते हैं, वे अज्ञानसे कहते हैं, ऐसा वैद्य ' भूतविद्यावाला जानकर त्याज्य है । तौ कौन प्रवेश करते हैं ? इस वास्ते कहते हैं ' तेषाम् ' अर्थात् उन देवताओंके परिचारक ( नौकर ) जो करोडों हजारों पद्म- संख्यक रुधिर, वसा, मांसके भोजन करनेवाले भयंकर, रात्रिमें विचरनेवाले हैं वें प्रवेश करते हैं ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थदीपिकामाथुरीभाषा- टीकायामुन्मादरोगनिदानं समाप्तम् ॥ १ ग्रहा गृह्णन्ति ये येषु तेषां तेषु विशेषतः । दिनेषु बलिहोमादीन्प्रयुंजीत चिकित्सकः ॥