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महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariSanskritpublished2,256 pages

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Page 702

उत्पत्तिका वह शुभ वृत्तान्त सुनो ।। ६ ।।
दक्षाददितिरदितेर्विवस्वान् विवस्वतो मनुर्मनो-रिला इलायाः पुरूरवाः पुरूरवस आयुरायुषो नहुषो नहुषाद् ययातिः; ययातेर्द्वे भार्ये बभूवतुः ।। ७ ।।
उशनसो दुहिता देवयानी; वृषपर्वणश्च दुहिता शर्मिष्ठा नाम ।। ८ ।।
दक्षसे अदिति, अदितिसे विवस्वान् (सूर्य), विवस्वान्‌से मनु, मनुसे इला, इलासे पुरूरवा, पुरूरवासे आयु, आयुसे नहुष और नहुषसे ययातिका जन्म हुआ। ययातिकी दो पत्नियाँ थीं पहली शुक्राचार्यकी पुत्री देवयानी तथा दूसरी वृषपर्वाकी पुत्री शर्मिष्ठा ।। ८ ।।
अत्रानुवंशश्लोको भवति—
यदुं च तुर्वसुं चैव देवयानी व्यजायत ।
द्रुह्युं चानुं च पूरुं च शर्मिष्ठा वार्षपर्वणी ।। ९ ।।
यहाँ उनके वंशका परिचय देनेवाला यह श्लोक कहा जाता है—
देवयानीने यदु और तुर्वसु नामवाले दो पुत्रोंको जन्म दिया और वृषपर्वाकी पुत्री शर्मिष्ठाने द्रुह्यु, अनु तथा पूरु—ये तीन पुत्र उत्पन्न किये ।। ९ ।।
तत्र यदोर्यादवाः; पूरोः पौरवाः ।। १० ।।
इनमें यदुसे यादव और पूरुसे पौरव हुए ।। १० ।।
पूरोस्तु भार्या कौसल्या नाम । तस्यामस्य जज्ञे जनमेजयो नाम; यस्त्रीनश्वमेधानाजहार, विश्वजिता चेष्ट्वा वनं विवेश ।। ११ ।।
पूरुकी पत्नीका नाम कौसल्या था (उसीको पौष्टी भी कहते हैं)। उसके गर्भसे पूरुके जनमेजय नामक पुत्र हुआ (इसीका दूसरा नाम प्रवीर है); जिसने तीन अश्वमेध यज्ञोंका अनुष्ठान किया था और विश्वजित् यज्ञ करके वानप्रस्थ आश्रम ग्रहण किया था ।। ११ ।।
जनमेजयः खल्वनन्तां नामोपयेमे माधवीम् । तस्यामस्य जज्ञे प्राचिन्वान्; यः प्राचीं दिशं जिगाय यावत् सूर्योदयात्, ततस्तस्य प्राचिन्वत्त्वम् ।। १२ ।।
जनमेजयने मधुवंशकी कन्या अनन्ताके साथ विवाह किया था। उसके गर्भसे उनके प्राचिन्वान् नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। उसने उदयाचलसे लेकर सारी प्राची दिशाको एक ही दिनमें जीत लिया था; इसीलिये उसका नाम प्राचिन्वान् हुआ ।। १२ ।।
प्राचिन्वान् खल्वश्मकीमुपयेमे यादवीम् । तस्यामस्य जज्ञे संयातिः ।। १३ ।।
प्राचिन्वान्‌ने यदुकुलकी कन्या अश्मकीको अपनी पत्नी बनाया। उसके गर्भसे उन्हें संयाति नामक पुत्र प्राप्त हुआ ।। १३ ।।
संयातिः खलु दृषद्वतो दुहितरं वराङ्गीं नामोपयेमे । तस्यामस्य जज्ञे अहंयातिः ।। १४ ।।
संयातिने दृषद्वान्‌की पुत्री वरांगीसे विवाह किया। उसके गर्भसे उन्हें अहंयाति नामक पुत्र हुआ ।। १४ ।।