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महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariSanskritpublished2,343 pages

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Page 1880

राजन्! ऐसा कहकर कुन्तीकुमार भीमने स्वर्णभूषित दस तीखे बाणोंद्वारा आपके पुत्र दुर्योधनको बींध डाला और नन्दककी छातीमें भी तीन बाणोंसे गहरी चोट पहुँचायी ॥ १४-१५ ॥ तं तु दुर्योधनःषष्ट्या विद्ध्वा भीमं महाबलम् । त्रिभिरन्यैः सुनिशितैर्विशोकं प्रत्यविध्यत ॥ १६ ॥ यह देख दुर्योधनने साठ बाणोंसे महाबली भीमसेनको घायल करके अन्य तीन पैने बाणोंसे सारथि विशोकको भी घायल कर दिया ॥ १६ ॥ भीमस्य च रणे राजन् धनुश्छिच्छेद भासुरम् । मुष्टिदेशे भृशं तीक्ष्णैस्त्रिभिर्भल्लैर्हसन्निव ॥ १७ ॥ राजन्! इसके बाद दुर्योधनने युद्धस्थलमें तीन अत्यन्त तीखे भल्लोंद्वारा हँसते हुए-से भीमके तेजस्वी धनुषको भी बीचसे काट दिया ॥ १७ ॥ समरे प्रेक्ष्य यन्तारं विशोकं तु वृकोदरः । पीडितं विशिखैस्तीक्ष्णैस्तव पुत्रेण धन्विना ॥ १८ ॥ अमृष्यमाणः संरब्धो धनुर्दिव्यं परामृशत् । पुत्रस्य ते महाराज वधार्थं भरतर्षभ ॥ १९ ॥ समाधत्त सुसंक्रुद्धः क्षुरप्रं लोमवाहिनम् । तेन चिच्छेद नृपतेर्भीमः कार्मुकमुत्तमम् ॥ २० ॥ आपके धनुर्धर पुत्रद्वारा समरांगणमें अपने सारथि विशोकको तीखे बाणोंके आघातसे पीड़ित होता देख भीमसेन सह न सके। उन्होंने कुपित होकर अपना दिव्य धनुष हाथमें लिया। महाराज! भरतश्रेष्ठ! फिर आपके पुत्रके वधके लिये अत्यन्त कुपित होकर उन्होंने पंखयुक्त क्षुरप्रका संधान किया और उसके द्वारा राजा दुर्योधनके उत्तम धनुषको काट डाला ॥ १८—२० ॥ सोऽपविद्धय धनुश्छिन्नं पुत्रस्ते क्रोधमूर्च्छितः । अन्यत् कार्मुकमादत्त सत्वरं वेगवत्तरम् ॥ २१ ॥ राजन्! धनुष कटनेपर आपका पुत्र क्रोधसे मूर्च्छित हो उठा। उसने उस कटे हुए धनुषको फेंककर तुरंत ही उससे भी अधिक वेगशाली दूसरा धनुष ले लिया ॥ २१ ॥ संदधे विशिखं घोरं कालमृत्युसमप्रभम् । तेनाजघान संक्रुद्धो भीमसेनं स्तनान्तरे ॥ २२ ॥ फिर उसके ऊपर काल और मृत्युके समान तेजस्वी भयंकर बाण रखा और कुपित हो उसके द्वारा भीमसेनकी छातीमें गहरा आघात किया ॥ २२ ॥ स गाढविद्धो व्यथितः स्यन्दनोपस्थ आविशत् । स निषण्णो रथोपस्थे मूर्च्छामभिजगाम ह ॥ २३ ॥