BharatKosha
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariSanskritpublished3,237 pages

Page 2 of 3237

Read in context
Page 2

35

॥ श्रीहरिः ॥ श्रीमन्महर्षि वेदव्यासप्रणीत

महाभारत

(चतुर्थ खण्ड)

[द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक और स्त्रीपर्व]

(सचित्र, सरल हिंदी-अनुवादसहित)


त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव
त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥


अनुवादक—
(साहित्याचार्य पण्डित रामनारायणदत्त शास्त्री पाण्डेय ‘राम’)

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व · Page 2 of 3237 · BharatKosha