महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
DevanagariSanskritpublished3,237 pages
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भीमसेनस्तु विस्फार्य चापं हेमपरिष्कृतम् ।। ३४ ।। आहवेऽतिरथोऽतिष्ठज्ज्वलन्निव हुताशनः ।। ३५ ।। परंतु अतिरथी भीमसेन अपने सुवर्णभूषित धनुषको ताने हुए प्रज्वलित अग्निके समान युद्धस्थलमें ही खड़े रहे ।। ३४-३५ ।।
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि कर्णपयाने चतुस्त्रिंशदधिकशततमोऽध्यायः ।। १३४ ।। इस प्रकार श्रीमद्महाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें कर्णका पलायनविषयक एक सौ चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। १३४ ।।