महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व
Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
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Read in contextआपके नेत्र श्वेत पिङ्गलवर्णके हैं, काले और लाल रंगके हैं। आप प्राणवायु (श्वास)को जीतनेवाले, दण्ड (आयुध) रूप, ब्रह्माण्डरूपी घटको फोड़नेवाले तथा कृश-शरीरधारी हैं। आपको नमस्कार है ।। १०८ ।।
धर्मकामार्थमोक्षाणां कथनीयकथाय च । सांख्याय सांख्यमुख्याय सांख्ययोगप्रवर्तिने ।। १०९ ।। धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष देनेके विषयमें आपकी कीर्तिकथा वर्णन करनेके योग्य है। आप सांख्यस्वरूप, सांख्ययोगियोंमें प्रधान तथा सांख्यशास्त्रको प्रवृत्त करनेवाले हैं। आपको प्रणाम है ।। १०९ ।।
नमो रथ्यविरथ्याय चतुष्पथरथाय च । कृष्णाजिनोत्तरीयाय व्यालयज्ञोपवीतिने ।। ११० ।। आप रथपर बैठकर तथा बिना रथके भी घूमनेवाले हैं। जल, अग्नि, वायु तथा आकाश—इन चारों मार्गोंपर आपकी गति है। आप काले मृगचर्मको दुपट्टेकी भाँति ओढ़नेवाले तथा सर्पमय यज्ञोपवीत धारण करनेवाले हैं। आपको प्रणाम है ।। ११० ।।
ईशान वज्रसंघात हरिकेश नमोऽस्तु ते । त्र्यम्बकाम्बिकानाथाय व्यक्ताव्यक्त नमोऽस्तु ते ।। १११ ।। ईशान! आपका शरीर वज्रके समान कठोर है। हरिकेश! आपको नमस्कार है। व्यक्ताव्यक्तस्वरूप परमेश्वर! आप त्रिनेत्रधारी तथा अम्बिकाके स्वामी हैं। आपको नमस्कार है ।। १११ ।।
काम कामद कामघ्न तृप्तातृप्तविचारिणे । सर्व सर्वद सर्वघ्न संध्याराग नमोऽस्तु ते ।। ११२ ।। आप कामस्वरूप, कामनाओंको पूर्ण करनेवाले, कामदेवके नाशक, तृप्त और अतृप्तका विचार करनेवाले, सर्वस्वरूप, सब कुछ देनेवाले, सबके संहारक और संध्याकालके समान रंगवाले हैं। आपको प्रणाम है ।।
महाबल महाबाहो महासत्त्व महाद्युते । महामेघचयप्रख्य महाकाल नमोऽस्तु ते ।। ११३ ।। महाबल! महाबाहो! महासत्त्व! महाद्युते! आप महान् मेघोंकी घटाके समान रंगवाले महाकालस्वरूप हैं। आपको नमस्कार है ।। ११३ ।।
स्थूल जीर्णाङ्ग जटिले वल्कलाजिनधारिणे । दीप्तसूर्याग्निजटिले वल्कलाजिनवाससे । सहस्रसूर्यप्रतिम तपोनित्य नमोऽस्तु ते ।। ११४ ।। आपका श्रीविग्रह स्थूल और जीर्ण है। आप जटाधारी हैं। वल्कल और मृगचर्म धारण करते हैं। देदीप्यमान सूर्य और अग्निके समान ज्योतिर्मयी जटासे सुशोभित हैं। वल्कल और