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महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariSanskritpublished2,450 pages

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ये पश्यन्ति महात्मानो धृतिमन्तो मनीषिणः । ब्राह्मणा ब्रह्मयोनिस्था ह्ययोनिममृतात्मकम् ॥ २१ ॥ धैर्यवान्, मनीषी, ब्रह्मबोधक शास्त्रोंमें निष्ठा रखनेवाले और महात्मा ब्राह्मण ही उस अजन्मा एवं अमृतस्वरूप ब्रह्मका दर्शन कर पाते हैं ॥ २१ ॥ तदेवाणोरणुभ्योऽणु तन्महद्भ्यो महत्तरम् । तत् तत्त्वं सर्वभूतेषु ध्रुवं तिष्ठन् न दृश्यते ॥ २२ ॥ वह ब्रह्म अणुसे भी अणु और महान्से भी महान् कहा गया है। सम्पूर्ण प्राणियोंके भीतर वह अन्तर्यामीरूपसे अवश्य स्थिर रहता है तथापि किसीको दिखायी नहीं देता है ॥ २२ ॥ बुद्धिद्रव्येण दृश्येत मनोदीपेन लोककृत् । महत्तस्तमसस्तात् पारे तिष्ठन्नतामसः ॥ २३ ॥ स तमोनुद इत्युक्तः सर्वज्ञैर्वेदपारगैः । विमलो वितमस्कश्च निर्लिङ्गोऽलिङ्गसंज्ञितः ॥ २४ ॥ योग एष हि योगानां किमन्यद् योगलक्षणम् । एवं पश्यं प्रपश्यन्ति आत्मानमजरं परम् ॥ २५ ॥ सूक्ष्म बुद्धिरूप धन-सम्पन्न पुरुष ही मनोमय दीपकके द्वारा उस लोकस्रष्टा परमात्माका साक्षात्कार कर सकते हैं। वह परमात्मा महान् अन्धकारसे परे और तमोगुणसे रहित है; इसलिये वेदके पारगामी सर्वज्ञ पुरुषोंने उसे तमोनुद (अज्ञान नाशक) कहा है। वह निर्मल, अज्ञानरहित, लिंगहीन और अलिंग नामसे प्रसिद्ध (उपाधिशून्य) है। यही योगियोंका योग है। इसके सिवा योगका और क्या लक्षण हो सकता है। इस तरह साधना करनेवाले योगी सबके द्रष्टा अजर-अमर परमात्माका दर्शन करते हैं ॥ २३—२५ ॥ योगदर्शनमेतावदुक्तं ते तत्त्वतो मया । सांख्यज्ञानं प्रवक्ष्यामि परिसंख्यानदर्शनम् ॥ २६ ॥ यहाँतक मैंने तुम्हें यथार्थरूपसे योग-दर्शनकी बात बतायी है, अब सांख्यका वर्णन करता हूँ; यह विचारप्रधान दर्शन है ॥ २६ ॥ अव्यक्तमाहुः प्रकृतिं परां प्रकृतिवादिनः । तस्मान्महत् समुत्पन्नं द्वितीयं राजसत्तम ॥ २७ ॥ नृपश्रेष्ठ! प्रकृतिवादी विद्वान् मूल प्रकृतिको अव्यक्त कहते हैं। उससे दूसरा तत्त्व प्रकट हुआ, जिसे महत्तत्त्व कहते हैं ॥ २७ ॥ अहङ्कारस्तु महतस्तृतीयमिति नः श्रुतम् । पञ्चभूतान्यहङ्कारादाहुः सांख्यात्मदर्शिनः ॥ २८ ॥ महत्तत्त्वसे अहंकार प्रकट हुआ, जो तीसरा तत्त्व है। ऐसा हमारे सुननेमें आया है। अहंकारसे पाँच सूक्ष्म भूतोंकी अर्थात् पञ्चतन्मात्राओंकी उत्पत्ति हुई; यह सांख्यात्मदर्शी