महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व
Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
DevanagariSanskritpublished2,450 pages
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१. 'इह घटो अस्ति (यहाँ घड़ा है)'—इत्यादि रूपसे जो सत्तासूचक व्यवहार होता है, उसका नाम 'सद्भावयोग' है। २. 'इह घटो नास्ति (यहाँ घड़ा नहीं है)'—इत्यादि रूपसे जो असत्तासूचक व्यवहार होता है, वही 'असद्भावयोग' है। ३. यहाँ 'विधि' शब्दसे वासनाके बीजभूत धर्म और अधर्म समझने चाहिये। ४. वासनाका उद्बोधक संस्कार ही 'शुक्र' है। ५. वासनाके अनुसार विषयकी प्राप्तिके अनुकूल जो यत्न है, वही 'बल' है।