मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
by महर्षि मनु
Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)
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Read in context१२४ मनुस्मृति । निर्धूतदण्डास्तु-८ । ३१= ' इन मानव श्लोकों को रामायण में उद्धृत किया है- ' श्रूयते मनुना गीतौ श्लोकौ चारित्रवत्सलौ । गृहीतौ धर्मकुशलैस्तथा तच्चरितं मया ॥ ३० ॥ राजभिर्धूतदण्डाश्च कृत्वा पापानि मानवाः । निर्मलाः स्वर्गमायान्ति सन्तः सुकृतिनो यथा ॥ ३१ ॥ शासनाद्वापि मोक्षाद्वा स्तेनः पापात्प्रमुच्यते । राजा त्वशासत् पापस्य तदवाप्नोति किल्विषम् ॥ ३२ ॥' रामायण किष्किन्धाकाण्डवालिवध. कालवश किंचित् पाठभेद होगया है परंतु अर्थ एकही है। देखिये बड़े संतोष की वार्ता है कि-वही यह मनुस्मृति है जो कि वाल्मीक के समय में प्रचलित थी। मूल वाक्यों के ढूंढने में बड़ा क्लेश उठाना पड़ता है तो भी सफलता नहीं प्राप्त होती, कैसी सुविधा होती, यदि धर्मानुरागी प्रेसस्वामी स्मृति-इतिहास-पुराणों की अकारादि अनुक्रमणी भी छपा डालते, उस दशा में थोड़े प्रयास से भी बहुत कुछ सुधार की आशा थी.... ... । पहिले मनु के विषय में श्रुति लिखी है उसको देखने से यह शंका उत्पन्न होती है-मनु एक अनित्य पुरुष हैं जिसकी चर्चा श्रुति में आई है इस कारण मनु से पीछे की बनी श्रुति क्यों न हो ? इस शंका का समाधान मीमांसादर्शन के तन्त्र- वार्तिक में जो लिखा है उसका यह सारांश है-जैसे यज्ञ में १ ' वेदाङ्गोपाङ्गशास्त्राणां वर्णादिक्रमसूचना । मौलिकैः सह संवादो विद्याशोधनमुच्यते ॥' द्विवेदी.