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मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

by महर्षि मनु

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished649 pages

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इसलिए वह सब धन का स्वामी हो सकता है। जिस के उत्पन्न होने से, पितृऋण दूर होता है। और मोक्ष प्राप्त होता है वही धर्म- पुत्र है। दूसरों को काम से उत्पन्न जाने। बड़ा भाई, छोटे भाइयों का पालन पिता के समान करे। और छोटे भाई, बड़े भाई के साथ पिता के समान धर्मानुसार बर्ताव करें। ज्येष्ठ कुलं को बढ़ाता है और ज्येष्ठ ही नाश करता है, ज्येष्ठ गुणवान् जगत् में पूज्य है और सत्पुरुषों में निंदा नहीं पाता ॥१०४-१०६॥ यो ज्येष्ठो ज्येष्ठवृत्तिः स्यान्मातेव स पितेव सः। अज्येष्ठवृत्तिर्यस्तु स्यात्स संपूज्यस्तु बन्धुवत् ॥११०॥ एवं सह वसेयुर्वा पृथग्वा धर्मकाम्यया। पृथग् विवर्द्धते धर्मस्तस्माद्धर्म्या पृथक् क्रिया ॥१११॥ ज्येष्ठस्य विंश उद्धारः सर्वद्रव्याच्च यद्वरम्। ततोऽर्धं मध्यमस्य स्यात्तुरीयं तु यवीयसः ॥ ११२ ॥ ज्येष्ठश्चैव कनिष्ठश्च संहरेतां यथोदितम्। येऽन्ये ज्येष्ठकनिष्ठाभ्यां तेषां स्यान्मध्यमं धनम् ॥११३॥ जो बड़ा भाई बड़प्पन का बर्ताव करे वह माता-पिता के स- मान है। और वैसा बर्ताव न करे तो बन्धुवत् पूज्य है। भाइयों ने यदि बांट न किया हो तो साथ रहें और बांट कर लिया हो तो अ- लग अलग रहें। अलग रहने से धर्म-कर्म अधिक होता है ❋ इस लिए अलग रहना धर्मानुकूल है। बड़े भाई को बीसवां भाग अ- धिक भाग है और सब पदार्थों में जो उत्तम हो वह भी देना चा- हिए। मध्यम भाई को इसका आधा—चालीसवां भाग अधिक दें और बाक़ी धन को सब भाई समान बांट लें। बड़ा और सब से

❋ बृहस्पति का भी वचन है— 'एकपाकेन वसतां पितृदेवद्विजार्चनम्। एकम्भवद्विभक्तानां तदेवं स्याद् गृहे गृहे ॥' अर्थात् अलग रहने से पञ्चमहायज्ञादि भी अलग होते हैं। यों धर्मवृद्धि होती है। ४३