मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in context४४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह २५ घडी एक नही आवडे¹ तुम दरसण बिन मोय। तुम ही मेरे प्राण जो, कासू जीवण होय। धान² न भावै, नीद न आवै, बिरह सतावै मोय। घायळ सी घूमत फिरु रे, मेरो दरद न जाणै कोय। दिवस तो खाय गमायो रे, रैण गमाई सोय। प्राण गमायो झूरता³ रे, नैण गमाया रोय। जो मै ऐसा जाणती, प्रीत किए दुख होय। नगर ढिढोरा पीटती रे, प्रीत न कीज्यो कोय। पथ निहारु, डगर⁴ बुहारु⁵, ऊभी मारग जोई। मीराँ के प्रभु कब रे मिलोगे, तुम मिलिया सुख होई। ॥५३॥ पद की भाषा प्रधानत राजस्थानी है सिर्फ कुछ सर्वनाम खडी बोली के हैं। जैसे 'तुम' अत इनका भी राजस्थानी के अनुकूल 'थे' हो जाना ही अधिक युक्तियुक्त होगा। २६ को विरहणि को दुख जाणै हो। जा घट विरहा सोई लख⁶ है, कै कोई हरिजन मानै⁷ हो। रोगी आतर⁸ वेद बसत है, वैद ही ओखद जाणै हो। विरह करद९ उरि अतरि माही, हरि बिनि सुख काने¹⁰ हो। दुग्धा आरत फिरै दुखारी, सुरत बसी सुत मानै हो। छात्रग स्वाति बूँद मन माही, पिव पिव उकलाणै¹¹ हो। सब जग कूड़ो कंटक दुनिया दरध¹² न कोई पिछाणै हो। मीराँ के पति आप रमइया, दूजो नही कोई छाणै हो। ॥५४॥ १ चैन पडे, २ अन्न, ३ याद करते हुए, ४ रास्ता, ५ झाड दूं, साफ करदूँ, ६ अंदाज लगा लेना, ७ विश्वास कर ले, ८ अतर, ९ करक, १० काम है, छोटा है। ११ व्याकुल होना, १२ दर्द,