मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in contextवियोगाभिव्यक्ति ५७ ५१ पिया जी म्हारे नैणा आगे रहज्यो जी। नैणा आगे रहज्यो जी, म्हाने भूल मत जाज्यो जी। भौ सागर मे बही जात हूँ; बेग म्हांरी सुध लीज्यो जी। राणो जी भेज्या विष का प्याला, सो इमरित कर दीज्यो जी। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, मिल बिछुडन मत कीज्यो जी। ॥७९॥† उपर्युक्त दोनो पदो मे प्राप्त साम्य के आधार पर यह पद भी ⁓ पद स० ५० का ही गेय रुपान्तर प्रतीत होता है। अन्तिम पंक्ति तो हूबहू वही है। अन्य पंक्तिया भी विभिन्न पदों मे मिल जा सकती है। गेय परम्परा से प्राप्त पदो मे ऐसे सम्मिश्रण का होना असम्भव नही।¹ ५२ कहो ने जोशी² प्यारा, राम मिलण कद होसी। जो जोशी मोहे प्रभु मिले, तो हीरा जडावूँ थारी पोथी। जो जोशी मोहे प्रभु ना मिले, तो झूठी पडे तेरी पोथीं। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, राम मिले सुख होसी। ॥८०॥ ⁓ ५३ इतनूँ काई छै मिजाज म्हारे मदिर आवता। थाने इतनूँ काई छै मिजाज। तन मन धन सब अरपण कीनूँ, छाडी छै कुल की लाज। दो कुल त्याग भई वैराग ण, आप मिलन की लाग। मीराँ के प्रभु कबर मिलोगे, कुबज्या आई काई या है। ॥८१॥† अन्तिम पंक्ति का उत्तरार्द्ध अर्थ हीन है। प्रथम दो पंक्तियो की अभिव्यक्ति मे समर्पण की वह गहराई नही, जो मीराँ के पदो की विशेषता है। १ देखे 'मीराँ, एक अध्ययन,' २ कुल पुरोहित।