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मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)

Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)

DevanagariHindipublished173 pages

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११६ मुद्राराक्षस—

प्रियम्बदक ।—अमात्य की जो आज्ञा (जाता है) । (प्रतिहारी आता है)

प्रतिहारी ।—अमात्य की जय हो। कुमार अमात्य को देखना चाहते हैं।

५ राक्षस ।—भद्र ! क्षण भर ठहरो। बाहर कौन है ? (एक मनुष्य आता है)।

मनुष्य ।—अमात्य ! क्या आज्ञा है ?

राक्षस ।—भद्र ! शकटदास से कहो कि जब से कुमार ने हम को आभरण पहराया है तब से उन के सामने नगे अंग १० जाना हम को उचित नही है। इस से जो तीन आभरण मोल लिये हैं उन में से एक भेज दें।


नाम और देश का कुछ और पता मिलने को हम सिकंदर क विजय की बडी बडी पुस्तको को देखें। क्योकि बहुत सी बाते जिन का पता इस देश की पुस्तको से नहीं लगता विदेशी पुस्तकें उन को सहज में बतला देती हैं। इस हेतु यहा तीन अगरेजी पुस्तको से हम थोडा सा अनुवाद करते हैं—( 1 ) Alexander the Great and his successors, ( 2 ) History of Greece ( 3 ) Plutarch s lives of illustrious men V II “सिकंदर के सिपाही लोग केवल ऋतु और थकावट ही से नहीं डरे कि तु उन्हो ने यह भी सुना कि गगा छ सौ फुट गहरी और चार मील चौटी है। Ganderites और Praisians के राजगण अस्सी हजार सवार, दो लाख सिपाही छ हजार हाथी और आठ हजार रथ सजे हुए सिकंदर से लडने को तैयार हैं। इतनी सैना मगध देश में एकत्र होना कुछ आश्चर्य की बात नहीं क्योकि ऐन्डाकुत्तस (चद्रगुप्त) ने सिल्यूकस को एक ही बेर पाच सौ हाथी दिए थे और एक बेर छ लाख सैना लेकर मारा हिंदुस्तान जीता था। यह गान्दरिटस गान्धार और प्रेसियन फारस प्रात के किसी देश का नाम होगा। हम को इन पाच राजाओ में कुलूत और मलय इन दो देशो की विशेष चिंता है इस हेतु इन देशो का विशेष अन्वेषण कर के आग लिखते हैं ‘ एक बेर सिकंदर [Malli] माल्लि वा मल्लि नामक भारत के विख्यात लटनवाली जाति से जब वह उन को जीतने को गया था मरते मरते बचा। जब सिकन्दर ने उन लोगो का दुर्ग घेर लिया और दीवार पर के लोगों को अपने शस्त्र से मार डाला तो साहस कर क अकेला दीवार पर चढ कर भीतर कूद पडा और वहा