मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
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Read in context१६४ मुद्राराक्षस-
चला गया। फिर शकटाल के कौशल से चाणक्य नन्द के नाश का कारण हुआ। उसी समय शकटाल ने हिरण्यगुप्त को कि योगानन्द का पुत्र था उस को मार कर चन्द्रगुप्त को, जो कि असली नन्द का पुत्र था, गद्दी पर बैठाया। ५ ढुंढि पण्डित लिखते हे कि सर्वार्थसिद्धि नन्दों मे मुख्य था। इस को दो स्त्रिया थी। सुनन्दा बड़ी थी और दूसरी शूद्रा थी, उस का नाम मुरा था। एक दिन राजा दोनों रानियों क साथ एक ऋाष के यहा गया और ऋषिकृत मार्जन के समय सुनन्दा पर नौ और मुरा पर एक छींट पानी की पड़ी। १० मुरा ने ऐसी भक्ति से उस जल को ग्रहण किया कि ऋषि ने प्रसन्न हो कर वरदान दिया। सुनन्दा को एक मासपिण्ड और मुरा को मौर्य उत्पन्न हुआ। राक्षस ने मास पिण्ड काट कर नौ टुकड़े किया, जिससे नौ लड़के हुए। मौर्य को सौ लडके थे, जिस मे चन्द्रगुप्त सब से बड़ा बुद्धि १५ मान् था। सर्वार्थसिद्धि ने नन्दों को राज्य दिया और आप तपस्या करने लगा। नन्दों ने ईर्षा से मौर्य और उस के लड़कों को मार डाला, किन्तु चन्द्रगुप्त चाणक्य ब्राह्मण के पुत्र विष्णु- गुप्त की सहायता से नन्दों को नाश कर के राजा हुआ। योंही भिन्न २ कवियों और विद्वानों ने भिन्न भिन्न कथाये २० लिखी है। किन्तु सब के मूल का सिद्धान्त पास पास एक ही आता है। इतिहासतिमिरनाशक मे इस विषय मे जो कुछ लिखा है वह नीचे प्रकाश किया जाता है। बिम्बसार को उस के लड़के अजातशत्रु ने मार डाला। २५ मालूम होता है कि यह फसाद ब्राह्मणों ने उठाया। अजातशत्रु बौद्ध मत का शत्रु था। शाक्यमुनि गौतम बुद्ध श्रावस्ति मे रहने लगा। यहा भी प्रसेनजित को उस के बेटे ने गद्दी से उठा दिया, शाक्यमुनि गौतम बुद्ध कपिलवस्तु मे गया।