मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
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Read in context१६६ मुद्राराक्षस-
बहादुर था, शेर ने इस का पसीना चाटा था और जंगली हाथी ने इसके सामने सिर झुका दिया था।
पुराणों ने बिम्बसार को शिशुनाग के बेटे काकवर्ण का परपोता बतलाया है और नन्दिवर्द्धन को बिम्बसार के बेटे अजातशत्रु का परपोता, और कहा है कि नन्दिवर्द्धन का बेटा महानन्द और महानन्द का बेटा शूद्रा से महापद्मनन्द और इसी महापद्मनन्द और उसके आठ लडकों के बाद, जिन्हे नवनन्द कहते हैं, चन्द्रगुप्त मौर्य गद्दी पर बैठा। बौद्ध कहते हैं कि तक्षसिला के रहनेवाले चाणक्य ब्राह्मण ने धननन्द को मार के चन्द्रगुप्त को राजसिंहासन पर बैठाया और वह मोरिया नगर के राजा का लड़का था और उसी जाति का था जिस मे शाक्यमुनि गोतम बुद्ध पैदा हुआ।
मेगास्थिनीज लिखता है कि पहाड़ो मे शिव और मैदान मे विष्णु पुजाते हैं। पुजारी अपने बदन रंग * कर और सिर मे फूलों की माला लपेट कर घण्टा और झांझ बजाते हैं। एक वर्ण का आदमी दूसरे वर्ण की स्त्री ब्याह नही सकता है और पेशा भी दूसरे का इख्तियार नही कर सकता है। हिन्दू घुटने तक जामा पहनते हैं और सिर और कन्धों पर कपडा + रखते हैं। जूते उन के रङ्ग बरङ्ग के चमकदार और कारचोबी के होते हैं। बदन पर अक्सर गहने भी मिहदी से रंगते हैं और दाढी मूछ पर खिजाब करते हैं। छतरी, सिवाय बड़े आदमियों के, और कोई नही लगा सकता। रथों मे लडाई के समय घोड़े और मजिल काटने के लिये बैल जोते जाते है। हाथियों पर भारी जर्दोजी झूल डालते हैं। सडकों की मरम्मत होती है, पुलिस का अच्छा इन्तिजाम है। चन्द्रगुप्त के लशकर
* च दन इत्यादि लगा कर।
+ अर्थात् पगड़ी दुपट्टा।