मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
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Read in contextशेषपूरण ।
इस लेख के पढने से स्पष्ट होगा कि श्रीमान् भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी के सामने ही यह लेख पण्डित विनायक शास्त्री जी ने सुनाया था और इसी हेतु उन को इस विषय मे स्मरण देकर मगाया है—जो 'चन्द्रबिम्ब पूरन भये ' दोहे के ऊपर ३ पत्र के नोट पर समझना चाहिये—
श्री भारतेन्दु का इस उदयपुर मे शुभागमन हुआ । उस समय मुद्राराक्षस छप चुका था केवल उस के विषय मे क्रूर-ग्रह सकेतु ' इस श्लोक पर श्री ६ गुरुवर्य बापूदेव शास्त्री जी का और श्रीसुधाकर जी का आशय विचार किया गया था उस पर यही निम्न लिखित विचार श्री गुरुचरणों का ध्यान करने से हृदय मे उपस्थित हुआ सो दूसरे दिन मै ने श्री भारते दु को सुनाया । उसी क्षण बड़ी प्रसन्नता से उत्तर दिया कि मुद्राराक्षस के द्वितीय सस्करण मे तुम्हारा यह विषय अवश्य ही दे दिया जायगा ।
इधर हरिश्चन्द्रकला का जन्म हुआ, आप का पत्र भी आया पर मै अभागी अनेक कार्यों से व्यग्र नही जानता था कि मुद्राराक्षस ही पहिले छपेगा । अस्तु, आप अपने पत्र का उत्तर और यह विषय दोनों लीजिये और “ कला ” के किसी अङ्क मे अङ्कित कीजिये ।
जिस परविचार था वह श्लोक यह है —
क्रूरग्रहस्सकेतुश्चन्द्रमसम्पूर्णमण्डलमिदानीम् ।
अभिभवितुमिच्छति बलाद्रक्षत्येनन्तु बुधयोग ॥ १ ॥
इस का अन्वय सहित अर्थ जो ग्रहण के अर्थ को प्रकाशित करता है। स क्रूरग्रह केतु इदानी पूर्णमण्डल चन्द्रमस बलात् अभिभवितुमिच्छति एन बुधयोगस्तु रक्षति । यह क्रूरग्रह केतु इस समय पूरे चन्द्रर्मा को